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मांगे दरकिनार, NCR पर नहीं हुई प्रभु की कृपा

Fri, 27 Feb 2015 02:03 PM IST
Updated Fri, 27 Feb 2015 02:03 PM IST
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The demands of these ministers were not even considered in rail budget

भाजपा की केंद्र सरकार ने आगामी समय में सियासी पटरी पर गाड़ी दौड़ाने के लिए दिल्ली के अलावा एनसीआर के गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा के सांसदों को केंद्रीय मंत्री तो बना दिया, लेकिन उनकी गाड़ी तेजी से दौड़ाने को प्रभु की इच्छा नहीं दिखी। इनमें से कुछ मंत्रियों की मांगों को भी रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अनदेखा कर दिया।

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भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत के बीच फरीदाबाद के सांसद कृष्णपाल गुर्जर को सामाजिक न्याय राज्यमंत्री, गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत को रक्षा राज्यमंत्री, गाजियाबाद के सांसद जनरल वीके सिंह को विदेशी मामलों का राज्य मंत्री और नोएडा के सांसद महेश शर्मा को सांस्कृतिक एवं पर्यटन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया था।
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इनके अलावा दिल्ली से डॉ. हर्षवर्धन को विज्ञान एवं तकनीक का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। दरअसल, हरियाणा में हो चुके चुनावों से पहले फरीदाबाद व गुड़गांव के सांसदों व उसके बाद यूपी के चुनाव के मद्देनजर नोएडा के सांसद को मंत्रालय में स्थान मिला।
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हरियाणा के मंत्री भी रेल बजट को नहीं कर सके पक्ष में

The demands of these ministers were not even considered in rail budget

जबकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु के भाजपा में आने के बाद उन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजा गया। एनसीआर के यूपी और हरियाणा के शहरों का केंद्रीय मंत्रिमंडल में इस तरह का प्रभावी लिंक पहली बार दिखने के बावजूद भी रेल बजट को ये अपने पक्ष में नहीं मोड़ सके।


गुड़गांव और फरीदाबाद के सांसदों ने दिल्ली के स्टेशनों के आधुनिकीकरण, लोकल व पूर्वांचल के लिए ट्रेनें व फरीदाबाद में बॉटलिंग प्लांट सहित कई मांगें रखी थी, लेकिन मेवात तक रेल जाने की मांग उनकी ओर से प्रभावी ढंग से नहीं रखी गई।

यही कारण रहा कि अन्य अधिकांश मांगों के अलावा मेवात में इंजन की सीटी बजने का वहां के लोगों का सपना इस बार भी पूरा नहीं हो सकेगा। इसके अलावा नोएडा में भी ट्रेन ले जाने की कोई कोशिश इस बजट में नहीं दिखी। हालांकि वर्षों पुरानी योजना में शामिल गौतमबुद्ध नगर जिले सहित चार डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर इस वर्ष पूरा करने की बात कही गई है।

राजधानी के भी हाथ कुछ खास नहीं आया

The demands of these ministers were not even considered in rail budget

यही नहीं, एक दो छोटी-मोटी व्यावसायिक घोषणाओं के अलावा राजधानी भी इस बार खाली हाथ है। रेलवे ने एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में रेलवे का किसी तरह का प्लांट लगाने की भी घोषणा नहीं की।

लिहाजा रोजगार के क्षेत्र में भी कोई पहल नहीं हो सकी। बजट की बारीकियां समझने वालों के लिए तो ठीक है, लेकिन एनसीआर में हर तरह के तबके के बहुमत वाले वोटरों के बीच इन नेताओं को जवाब देने में दिक्कत आ सकती है।

ऐसा भी पहली बार हुआ, जबकि कोई लोकल ट्रेन एनसीआर के शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नहीं मिली है, जबकि दिल्ली-शामली सहित कई पैसेंजर ट्रेनों में राजधानी में ही छत पर सफर करते हुए यात्री दिख जाते हैं।

आधुनिकीकरण और तकनीकी के इस्तेमाल की कई बातें तो की गई हैं, लेकिन यह एनसीआर के किन स्टेशनों पर और कब लागू होंगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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