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भारी आर्थिक नुकसान भांपकर लॉकडाउन लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही सरकार

Thu, 19 Nov 2020 05:51 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 19 Nov 2020 05:51 PM IST
सार

  • कोरोना को हराने के लिए मास्क-शारीरिक दूरी जैसे नियमों को कठोर बनाने की रणनीति 
  • बाजारों में आंशिक लॉकडाउन या ऑड-ईवन लागू कर सकती है सरकार

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The Delhi government know that impose of lockdown will incurring huge financial losses
भारत में कोरोना वारयरस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

विस्तार

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कोरोना के कारण बुधवार 18 नवंबर को दिल्ली में 131 लोगों की जान चली गई। राजधानी में किसी एक दिन में कोरोना से होने वाली मौतों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस दिन केवल 24 घंटों में कोविड के 7486 नए मरीज भी सामने आए। कोरोना मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने के बाद भी सरकार राजधानी में लॉकडाउन लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। इसके पीछे लॉकडाउन के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कोरोना से ज्यादा भयावह होना माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार यह मानती है कि कोरोना से निबटने का तरीका लॉकडाउन नहीं हो सकता। इसे बेहतर मेडिकल मैनेजमेंट और मास्क-शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करके ही किया जा सकता है।

लॉकडाउन का किया विरोध

इसके पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संकेत दिया था कि अगर राजधानी में कोरोना के मामले नियंत्रण में नहीं आते हैं तो कुछ बाजारों या चुने हुए इलाकों में कुछ समय के लिए आंशिक लॉकडाउन लगाया जा सकता है। इससे व्यापारियों में खलबली मच गई और अनेक व्यापारी संगठनों ने मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर राजधानी में लॉकडाउन लगाने का विरोध किया। स्थिति को देखते हुए दिल्ली के अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी स्पष्ट कर दिया कि राजधानी में पूरी तरह लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है। हम कोरोना को भी सबके सहयोग से मिलकर हराएंगे।

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कहां से आएगा पैसा

कोरोना काल में आर्थिक गतिविधियों के बंद होने के कारण राज्य सरकारें ही नहीं, केंद्र सरकार भी आऱ्थिक तंगी में है। वह भी राज्यों को उनका पर्याप्त हिस्सा नहीं दे पा रही है। दिल्ली सरकार में वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर केंद्र सहयोग नहीं करता है तो उसके सभी कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं रह जाएंगे। दिल्ली में कोरोना मामलों के कारण अतिरिक्त धन खर्च हो रहा है। इसके साथ ही अन्य सामाजिक योजनाओं में भी धन खर्च किया जा रहा है। अगर दिल्ली में लॉकडाउन दोबारा लगाया गया तो सरकार के सामने अभूतपूर्व आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

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पिछली बार पेट्रोल-शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने भरपाई करने की कुछ कोशिश की थी, लेकिन सरकार को आशंका है कि अगर फिर से इसी तरह की परिस्थिति पैदा होती है तो उसके लिए राजस्व एकत्र करना कठिन हो सकता है। यही कारण है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, फिलहाल लॉकडाउन न लगाने का निर्णय किया गया है। पिछले लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए लाखों लोग और काम के अभाव में भुखमरी की कगार पर पहुंच गए लोग सरकार के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गए थे। जाहिर है कि सरकार अब इस तरह की कोई स्थिति सामने नहीं आने देना चाहती है। 

सरकार ने बढ़ाई सख्ती

लॉकडाउन जैसा असर पाने के लिए लॉकडाउन की बजाय अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसमें सबसे पहला कदम मास्क न पहनने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी निजी कार में भी जा रहा है तो भी उसे मास्क लगाना अनिवार्य होगा क्योंकि सड़क एक सार्वजनिक जगह है जहां मास्क न लगाने से संक्रमण फैल सकता है।


दिल्ली के बाहर से आने वाले लोगों का रैंडम टेस्ट भी राजधानी में कोरोना प्रसार में कमी लाने में मदद कर सकता है। सरकार ने इसी बीच अस्पतालों में आईसीयू बेड्स और सामान्य बेड्स बढ़ाने का प्रयास तेज कर दिया है। सरकार के इन निर्णयों से स्पष्ट हो गया है कि वह कोरोना वायरस के प्रसार पर रोक लगाने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रही है। लेकिन इसके लिए लॉकडाउन जैसे सख्त उपाय नहीं अपनाएं जाएंगे।

लॉकडाउन से आएगी आर्थिक तबाही

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव वीके बंसल ने अमर उजाला से कहा कि इस समय दिल्ली सरकार के पास इतनी पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं हैं कि उनसे कोरोना संक्रमित हो रहे सभी लोगों का उचित इलाज किया जा सकता है। लेकिन अगर सरकार आर्थिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाता है, तो इससे एक साथ करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रभावित होगी। इससे बेरोजगारी, भुखमरी के कारण अनगिनत लोगों की जान जाएगी जो कोरोना की तुलना में ज्यादा भारी पड़ेगी।

वीके बंसल ने कहा कि सरकार ने शादियों में 200 की जगह केवल 50 मेहमानों के ही शामिल होने की अनुमति दी है। लेकिन पिछले आठ महीने से पूरी तरह खाली बैठे मंडप, टेंट, आतिशबाजी, बग्घी, फूल, ताशे वालों की जिंदगी के बारे में नहीं सोचा। यह ऐसा व्यापार है जो अधिकतम चार महीने ही चलता है। अगर इन्होंने इन चार महीनों में कुछ नहीं कमाया तो इनके लिए अगला पूरा साल लॉकडाउन की तरह हो जाएगा।

भाजपा ने किया विरोध

दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रमुख नवीन जिंदल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार यह समझ नहीं पा रही है कि उसे कोरोना से कैसे निबटना है। अरविंद केजरीवाल स्वयं मास्क न पहनने पर 2000 रुपये का आर्थिक दंड लगाते हैं लेकिन स्वयं पूरी कैबिनेट के साथ अक्षरधाम मंदिर में बिना मास्क के देखे जाते हैं। जब स्थिति खराब होती है तो केंद्र से मदद मांगते हैं लेकिन जब स्थिति संभल जाती है तो उसका श्रेय लेने के लिए स्वयं सामने आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली सरकार की अक्षमता बार-बार सामने आ रही है।

इस समय क्या है स्थिति

दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव होने की दर चिंताजनक ढंग से 12.03 फीसदी पर पहुंच गई है। बुधवार को कुल 62232 कोरोना टेस्ट किए गए, जिनमें 7486 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा जो एक फीसदी से कम चल रहा था, अचानक बढ़कर 1.48 फीसदी पर पहुंच गया है। अगर केवल पिछले 15 दिनों का आंकड़ा देखें तो यह दो फीसदी से भी ऊपर पहुंच गया है जो सरकार की चिंता बढ़ाने वाला है।

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