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एससीएसटी आयोग लेगा सूदखोरों का हिसाब

Thu, 07 May 2015 01:39 AM IST
अमर उजाला, मुरादनगर
अमर उजाला, मुरादनगर Updated Thu, 07 May 2015 01:39 AM IST
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The Commission will take account of Ssisti Sudkhoron.

सूदखोरों से परेशान दलित युवक विकास के आत्मदाह का मामला एससीएसटी आयोग पहुंच गया है। आयोग की टीम मुरादनगर आकर जांच करेगी और पीड़ित परिवार को राहत देने के मुद्दे पर प्रदेश सरकार से भी बात करेगी। आयोग मान रहा है कि इसमें पुलिस की भी लापरवाही रही होगी, जिसकी जांच की जाएगी।

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मुरादनगर थानांतर्गत सरना गांव निवासी विकास (26) पुत्र जगवीर ने रविवार को सूदखोरों के चुंगल में फंसकर आत्मदाह कर लिया था। मामले में दुहाई गांव निवासी जगदीश और सरना गांव के पप्पू एवं मुन्ना के विरुद्ध मृतक की पत्नी विमलेश ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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एसओ सुबोध सक्सेना का कहना है कि आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। एससीएसटी आयोग ने दलित युवक विकास के आत्मदाह प्रकरण को गंभीरता से लिया है।

एससीएसटी आयोग सदस्य की सदस्य किरण आरसी जाटव ने बताया कि पुलिस की भी लापरवाही रही है। टीम शीघ्र मुरादनगर आकर जांच करेगी और परिवार की स्थिति देखने के बाद राहत देने के मुद्दे पर प्रदेश सरकार से बात की जाएगी।
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बेबसी में आत्महत्या का रास्ता चुनते कर्जदार
इसे मजबूरी कहें, मुफलिसी या फिर बेबसी। कर्ज और सूदखोरों की धमकी से आहत आत्मदाह करने वाले विकास जैसे और भी कई हैं, जिन्होंने मुफलिसी के आगे मौत का रास्ता चुना।

दरअसल, मुरादनगर के गांव सरना के विकास जैसे काफी लोग सरकारी और प्राइवेट बैंकों से कर्ज की लंबी प्रक्रिया और अशिक्षित होने के कारण गांवों-कस्बों में सूदखोरों के जाल में फंस जाते हैं।

सूदखोरों का ब्याज बैंकों की अपेक्षा दो से तीन गुना ज्यादा होता है। बावजूद इसके कभी बेटी की शादी, बीमारी, व्यापार में घाटा कभी कोई और मजबूरी  में फंसने पर लोग तुरंत कर्ज ले तो लेते हैं लेकिन उसे अदा करने में पसीने छूट जाते हैं।

बाद में सूदखोरों की वसूली की प्रक्रिया सहन न कर पाने पर वे आत्महत्या-हत्या या फिर पलायन का शिकार हो जाते हैं। सूदखोर 5-10 रुपये प्रति सैकड़ा ब्याज पर रुपये देते हैं। कर्जदार द्वारा तयशुदा वक्त में ब्याज न चुकाने पर सूदखोर सूद पर भी सूद लेते हैं।

खंगाली जा रही सूदखोरों की कुंडली
मोदीनगर-मुरादनगर में बढ़ते सूदखोरी धंधे को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी सूदखोरों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।

सीओ जगत राम जोशी ने बताया कि गोपनीय तरीके से सूदखोरों के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है। इसी कड़ी में सूदखोरी के पुराने रिकार्ड भी खंगालने शुरू कर दिए गए हैं।

सिर्फ 40 ही लाइसेंसी सूदखोर
जिले में सूदखोरी का धंधा करने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। यहां गैर-लाइसेंसधारी सूदखोरों की तादाद हजारों में हैं, जबकि लाइसेंसी सिर्फ चालीस हैं, वह भी काफी पुराने। ऐसे सूदखोर भी हैं, जो कर्ज देने के लिए गारंटी नहीं मांगते।

कर्जदार द्वारा पैसे देने से मना करने पर या नहीं चुका पाने पर वे ताकत के बल पर कर्ज वसूलते हैं। कुछ ऐसे सूदखोर भी हैं जो कर्ज देते समय ब्याज की रकम पहले ही काट लेते हैं।

विमलेश को मासूमों की परवरिश की चिंता
विकास की मौत को लेकर तीसरे दिन भी विमलेश की सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही है। मासूमों को देख उसका दर्द बढ़ जाता है। बच्चों की परवरिश का बड़ा बोझ विमलेश कैसे निभा पाएगी यह भविष्य बताएगा।

तीन दिन बीतने के बाद भी अभी तक प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों ने गांव में जाकर परिवार की खैर खबर नहीं ली है। विकास सर्दी के मौसम में गुड और गर्मी में सब्जी बेचकर परिवार का पालन पोषण करता था।

एक साल के भीतर मां और पिता जगवीर की मौत के बाद से विकास टूट गया था। मां-बाप उसके पास रहते थे। भाभी सीमा ने बताया कि पिता जगवीर की मौत छह माह पहले हुई थी।

पिता भी मेहनत मजूदरी कर विकास के परिवार का सहारा बनते थे। पति विकास की मौत के बाद पत्नी विमलेश टूट गई। पति के दुनिया छोड़कर जाने का गम और अब दो मासूमों विक्रांत (8) एवं तरूण (6) की परवरिश का जिम्मा भी विमलेश के कंधों पर आ गया।


बुधवार को भी विमलेश का रो-रोकर बुरा हाल था। उसे सांत्वना देने के लिए ग्रामीणों को आवागमन लगा था। वहीं तीन दिन बीतने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने मौके पर जाना गंवारा नहीं समझा है। बताया जाता है कि मृतक विकास बहुजन समाज पार्टी में भी कार्यकर्ता था।

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