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बहलाने-फुसलाने के मामले अब होंगे एसआर केस
अरीश रिज़वी/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 21 Jun 2015 08:32 PM IST
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किशोरी या युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले अब एसआर केस होंगे। यानि विशेष अपराध (एसआर) की श्रेणी रखे जाएंगे।
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सूबे के डीजीपी ने इस संबंध में सभी पुलिस प्रमुखों को एडवाजरी भेजी है, जिसमें निर्देश दिए गए हैं कि अगर लड़की का 45 दिन तक पता नहीं चलता है तो इस तरह के मामलों को एसआर श्रेणी में रखा जाए और जिले के एसएसपी या एसपी इसकी मॉनिटरिंग करें।
हत्या, लूट और अपहरण आदि बड़े मामलों को पुलिस एसआर केसों में रखती है। गंभीरता से उनकी जांच पड़ताल करती है, जबकि बहला-फुसलाकर ले जाने के मामलों को हल्के में लेती है।
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तलाश करना तो दूर, कई मामलों में तो रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की जाती है। डीजीपी ने माना है कि ये गंभीर अपराध है, लिहाजा 45 दिन बाद इसे एसआर केस माना जाए।
इतनी ही नहीं, इन केसों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीधे पुलिस कप्तान को दी है। गाजियाबाद जिले में हर साल 200 से ज्यादा लड़कियां बहला-फुसलाकर ले जाई जाती हैं, इनमें कुछ का तो पता भी नहीं चल पाता है।
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पिछले तीन सालों में साढ़े छह सौ से ज्यादा लड़कियां बहला-फुसलाकर ले जाई गई हैं। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह का कहना हैकि डीजीपी के आदेशों का पालन कराया जाएगा।
गाजियाबाद में दर्ज बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले
वर्ष-केस
2012-255
2013-228
2014-211