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सफेदपोश 'आतंकी' मॉड्यूल: साझा ईमेल अकाउंट इस्तेमाल कर रहे थे 'आतंकी', बातचीत के लिए अपनाते थे अलग तरीका

Sat, 15 Nov 2025 03:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 15 Nov 2025 03:00 PM IST
सार

जांच के दायरे में आए आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने निगरानी से बचने के लिए असामान्य, लेकिन प्रभावी संचार तरीका अपनाते हुए साझा ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, डॉ. उमर नबी और उसके सहयोगी डॉ. मुजम्मिल गनी व डॉ. शाहीन शाहिद एक ही ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल कर परस्पर संवाद स्थापित करते थे, जो मॉड्यूल में सभी सदस्यों के लिए सुलभ था।

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Terror Module Used Shared Email Account To Evade Surveillance, Key Members Identified
Terror Module - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल को लेकर एक और नया खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हाल ही में उजागर किए गए एक आतंकी मॉड्यूल ने निगरानी से बचने के लिए संचार का एक बेहद ही असामान्य और प्रभावी तरीका अपनाया। 
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मॉड्यूल के सदस्यों ने एक साझा ईमेल अकाउंट का उपयोग किया, जिसके माध्यम से वे आपस में संवाद करते थे। यह रणनीति डिजिटल फुटप्रिंट को कम करने और जांचकर्ताओं को चकमा देने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई थी।
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जांचकर्ताओं के अनुसार, इस मॉड्यूल में शामिल डॉ. उमर नबी, डॉ. मुजम्मिल गनी और डॉ. शाहीन शाहिद एक ही ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल करते थे। यह अकाउंट मॉड्यूल के सभी सदस्यों के लिए सुलभ था, जिससे वे एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचा सकते थे।
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डिजिटल निशान से बचने की तकनीक
इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सीधे ईमेल भेजने के बजाय, एक अलग तरीका अपनाया। वे अपनी बात को ईमेल के ड्राफ्ट (Draft) सेक्शन में लिखते थे। जब भी किसी सदस्य को कोई महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाना होता था, तो वह इस साझा अकाउंट में लॉग इन करता, ड्राफ्ट में लिखे संदेश को पढ़ता और फिर उसे तुरंत डिलीट कर देता। इस प्रकार, भेजे गए ईमेल का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता था, जिससे उनकी गतिविधियों का कोई डिजिटल निशान नहीं बचता था।

एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस फिर पहुंची यूनिवर्सिटी परिसर
उधर, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में आतंकी मॉड्यूल और दिल्ली बम धमाके को लेकर शुक्रवार को भी जांच एजेंसियों की टीमें पहुंचीं। एनआईए और जम्मू कश्मीर पुलिस की टीमें दोपहर बाद यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचीं और जांच शुरू की।

 

टीमों ने यहां मौजूद कुछ स्टाफ, डॉक्टरों व छात्रों की भूमिका को लेकर जांच की। इस दौरान बृहस्पतिवार को यूनिवर्सिटी परिसर से पकड़े गए वासिद को लेकर भी टीम ने उसके सहकर्मियों से पूछताछ की। वासिद वही है जिसने लाल रंग की इको स्पोर्ट कार को खंदावली गांव में अपने रिश्तेदार फहीम के घर खड़ा किया था।
 

यूनिवर्सिटी के गेट पर व अंदर परिसर में शुक्रवार को बाकी दिनों जैसा माहौल व चहल-पहल नहीं दिखी। शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर 1100 बेड के अस्पताल में ओपीडी सेवा भी बंद रही। हर दिन यहां लगभग 200 मरीजों की ओपीडी होती थी जिसके चलते काफी लोग यहां आते। 
 

इस दौरान गेट पर भी चहल-पहल दिखाई देती। शुक्रवार को इस तरह का नजारा यहां देखने को नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस की चल रही कार्रवाई को लेकर अस्पताल में मरीजों को भर्ती करना भी अब बंद किया जा रहा है। साथ ही यहां भर्ती मरीजों को भी अब डिस्चार्ज किया जा रहा है।
 

शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर छात्रों की गतिविधियां भी बेहद कम देखने को मिली। रोज तो यहां के छात्र-छात्राएं कार में सवार होकर व पैदल ही यूनिवर्सिटी से अंदर-बाहर आते-जाते दिखाई देते। लेकिन शुक्रवार को इनकी चहल-पहल भी कम देखने को मिली।

यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने बताया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द होने और एनएएसी के नोटिस को लेकर प्रबंधन ने छात्रों को सूचित किया है। इसे लेकर छात्रों में टेंशन का माहौल है। सभी ये सोच रहे हैं कि इसमें आगे क्या प्रक्रिया होगी और क्या इससे यूनिवर्सिटी भी बंद हो जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो उनके भविष्य पर भी खतरा आ सकता है।
 

वहीं बृहस्पतिवार शाम से चर्चा ये भी है कि यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों ने भी यहां आतंकी मॉड्यूल के सामने आने के बाद से इस्तीफे दे दिए हैं। इनकी संख्या लगभग 10 बताई जा रही है। ये सभी हिंदू समुदाय के प्रोफेसर बताए जा रहे हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से अभी इस्तीफे मंजूर नहीं किए गए हैं। वहीं इस बारे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। 
 
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