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Delhi NCR News: शिक्षकों को उत्तराखंडी लोकभाषा और संस्कृति सहेजने पर मिला सम्मान
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एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में उत्तराखंड की संस्कृति और लोकभाषाओं को जीवित रखने में पूर्वी दिल्ली के शिक्षकों का अहम योगदान सामने आया है। दिल्ली गढ़वाली-कुमाऊनी-जौनसारी अकादमी की ओर से एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में पूर्वी दिल्ली के विभिन्न केंद्रों से जुड़े शिक्षकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
वर्ष 2012 से यह मंच गर्मियों की छुट्टियों में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की विशेष कक्षाएं और कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। इस वर्ष जून से अगस्त तक चले इस अभियान के तहत पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में कक्षाएं लगाई गईं। यहां के शिक्षकों और केंद्र संयोजकों ने बच्चों को मातृभाषा के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं से जोड़ा। समारोह में प्रत्येक केंद्र से चार-चार शिक्षकों और दो केंद्र संयोजकों को मंच पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भगवत मनराल की टीम द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना, जय हो कुमाऊं जय हो गढ़वाल गीत और उत्तराखंड से हो रहे पलायन पर आधारित नाटक रहा। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिक्षकों के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और मातृभाषा से जोड़ना बेहद जरूरी है।
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मंच के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती और शौर्य डोभाल ने भी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने पर बल दिया। इस अवसर पर निगम पार्षद बीएस पवार, नीता बिष्ट, यशपाल कैंतुरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में उत्तराखंड की संस्कृति और लोकभाषाओं को जीवित रखने में पूर्वी दिल्ली के शिक्षकों का अहम योगदान सामने आया है। दिल्ली गढ़वाली-कुमाऊनी-जौनसारी अकादमी की ओर से एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में पूर्वी दिल्ली के विभिन्न केंद्रों से जुड़े शिक्षकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
वर्ष 2012 से यह मंच गर्मियों की छुट्टियों में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की विशेष कक्षाएं और कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। इस वर्ष जून से अगस्त तक चले इस अभियान के तहत पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में कक्षाएं लगाई गईं। यहां के शिक्षकों और केंद्र संयोजकों ने बच्चों को मातृभाषा के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं से जोड़ा। समारोह में प्रत्येक केंद्र से चार-चार शिक्षकों और दो केंद्र संयोजकों को मंच पर सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भगवत मनराल की टीम द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना, जय हो कुमाऊं जय हो गढ़वाल गीत और उत्तराखंड से हो रहे पलायन पर आधारित नाटक रहा। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिक्षकों के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और मातृभाषा से जोड़ना बेहद जरूरी है।
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मंच के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती और शौर्य डोभाल ने भी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने पर बल दिया। इस अवसर पर निगम पार्षद बीएस पवार, नीता बिष्ट, यशपाल कैंतुरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।