टैटू के शौकीनों को डरा सकती है यह खबर
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स्वास्थ्य विभाग के दरवाजे पर गैर-कानूनी तरीके से टैटू बनाने का कारोबार चल रहा है। इससे खुद स्वास्थ्य विभाग अंजान है।
महज 600 रुपये लेकर बिना किसी सुरक्षा मानकों को पूरा किए टैटू गोदने का काम होता है। टैटू के शौकीन युवा स्वास्थ्य मानकों को ताक पर रखकर अपने शरीर पर टैटू गुदवा रहे हैं।
दरअसल, फिल्म अभिनेताओं की वजह से टैटू का क्रेज बढ़ रहा है। टैटू बनाने का कारोबार भी शहर के टैटू पार्लर के जरिए फल-फूल रहा है। लेकिन महंगी फीस होने की वजह से सभी कोई वहां तक पहुंचने में सक्षम नहीं है।
इस वजह से मध्यम दर्जे से ताल्लुक रखने वाले युवा गली छाप गोदना वाले से टैटू बनवा रहे हैं। बता दें कि टैटू पार्लर में 250 रुपये प्रति इंच फीस ली जाती है।
टैटू बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई गाइडलाइन नहीं है, लेकिन टैटू एसोसिएशन की ओर से कायदे कानून तय किए गए है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज मेहता कहते हैं कि टैटू में केमिकल का प्रयोग होता है।
गंभीर बिमारियों का खतरा
एक व्यक्ति का नीडल दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल करने से चर्म रोग, हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसी संक्रमित बीमारियां होने का खतरा है। टैटू बनाने के लिए दस्ताने का होना भी जरूरी है।
सिविल अस्पताल के पास सड़क किनारे जमीन पर बैठकर टैटू बनाने वाले हंसराज कहते है कि पहले गोदना बनाने का काम करते थे, अब वो टैटू बनाते हैं। महज एक मशीन से वो टैटू बनाने का काम कर रहे हैं।
डॉ. पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन: इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास लाइसेंस देने का कोई अधिकार नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़े होने के कारण अगर कोई शिकायत आती है तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।