सावधानः टैटू बनवाने से हो सकती है ये लाइलाज बीमारी
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नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी ने एचआईवी के संक्रमण के कारणों में टैटू को पांचवें नंबर पर शामिल किया है। इसकी पुष्टि जिला अस्पताल के एचआईवी परामर्शदाताओं ने की है। ऐसे लोग, जिनके शरीर में टैटू बना होगा, उनकी एचआईवी जांच अनिवार्य है।
एचआईवी संक्रमण के कारणों में असुरक्षित यौवन संबंध, संक्रमित सुई का इस्तेमाल, संक्रमित ब्लड चढ़ाने और संक्रमित मां से होने वाले शिशु को संक्रमण का खतरा शामिल है।
एचआईवी परामर्शदाता मनोज ने बताया कि एचआईवी होने के कारणों में पांचवें कॉलम में टैटू को रखा गया है। उन्होंने बताया कि सीएमओ डॉ.आरके गर्ग से उन्हें इस बात की जानकारी मिली है।
काउंसलिंग के दौरान भी ली जाएगी टैटू की जानकारी
परामर्शदाता ने बताया कि टैटू बनाने वाले तमाम लोग एक ही सुई को कई लोगों पर इस्तेमाल करते हैं, जिससे एचआईवी संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
रक्तदान शिविरों में रक्तदाताओं से अन्य सवालों के साथ यह प्रश्न भी किया जाता है कि आपके शरीर पर कहीं टैटू तो नहीं है। यदि टैटू है तो इस जानकारी को फार्म में भरा जाता है, क्योंकि एचआईवी संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
मनोज कुमार ने बताया कि एचआईवी जांच कराने वालों से काउंसलिंग के दौरान इस बात की जानकारी ली जाएगी कि उनके शरीर पर टैटू है या नहीं। लोगों को काउंसलिंग में यह भी सलाह दी जाएगी कि टैटू न बनवाएं तो बेहतर है क्योंकि उससे एचआईवी का संक्रमण हो सकता है।