‘..नजदीक से मौत का मंजर देखकर रूह कांप गई'
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नेपाल में भूकंप के बाद भारत सरकार के बचाव अभियान से बचकर आए भारतीय अपनी सरकार और खुदा का शुक्र अदा कर रहे हैं। तबाही का मंजर देखकर आए लोग कहते है भगवान कभी ऐसी हालत इंडिया को न दिखाए।
भारत सरकार के बचाव अभियान में काठमांडू से लौटे भारतीयों में दिल्ली-गुड़गांव और फरीदाबाद के एक टैटू आर्टिस्ट का समूह भी है। गुड़गांव के जैकबपुरा के रहने वाले दीपक कालरा कहते है कि नजदीक से मौत का मंजर देखकर रूह कांप गया है।
अब तो दोबारा नेपाल जाने से पहले हजार बार सोचना होगा। बकौल दीपक, काठमांडू के दरवार मार्ग स्थित होटल याक एंड येती में पांचवें इंटरनेशनल टैटू कन्वेंशन में हिस्सा लेने गए थे।
टैटू कंवेंशन के लिए गए थे नेपाल
दीपक ने बताया कि 'दो दिवसीय कन्वेंशन के आखिरी दिन 25 अप्रैल को हम सभी (फरीदाबाद के भरत जुनेजा, दिल्ली के चार्ली) इंडिया टैटू कन्वेंशन के बूथ पर बैठे थे। तभी झटके लगने शुरू हो गए। पहले तो लगा कि होटल से प्लेन टकरा कर क्रैश हो गया। जबतक कुछ समझते, पूरा होटल हिलने लगा।'
इतना जबरदस्त झटका था कि कि हम बयां नहीं कर सकते। फर्स्ट फ्लोर पर सारे बूथ गिरने लगे। झूमर गिरे। लाइट गिरी। विदेशी टैटू आर्टिस्ट, इंडिया आर्टिस्ट सभी में भगदड़ मच गई।
हमलोगों ने किसी तरह किनारे पर जाकर पिलर पकड़ा। दो सेकंड और भूकंप होता तो शायद हम लौट भी नहीं पाते। जैसे ही हल्का हुआ, जब बाहर की ओर भागे। बाहर निकलकर देखा, बिल्डिंगें गिरी हुई थी। कारों के ऊपर खंभे गिरे थे। पांच सितारा होटल की दीवारों में बड़े-बडे़ दरार हो चुके थे।
अस्पताल के बाहर लगा था शवों का ढेर
चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल था। सिर्फ चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी। करीब तीन घंटे के बीच रूक-रूक आ रही झटके से और थर्रा रहे थे।
एक अस्पताल के बाहर लाशों के ढेर लगा है। शव बेहद खराब हालत में थे। इस दृश्य से रूह कांप गई। बोलते-बोलते दीपक के आंखों में आंसू आ जाते है।
फरीदाबाद सेक्टर-23 में रहने वाले दीपक के साथी भरत जुनेजा कहते है सभी लोग सड़क पर थे। घरों के अंदर जाने की हिम्मत नहीं थी। दुकानें बंद। लाइट नहीं। पानी नहीं। खाने पीने का कुछ नहीं। हर तरफ चीख पुकार।
पूरा होटल खाली हो गया। फोन काम नहीं कर रहा था। एंबुलेंस शव को ले जा रहे थे। पूरी सड़क विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोगों से पटा था।
सेना नेपाल में कर रही है भरपूर मदद
भूकंप के बाद रात को बारिश ने हालत और खराब कर दिए। किसी तरह शाम को जब संपर्क हुआ तो भारतीय अभियान का पता चला। अब किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचने की जद्दोजहद शुरू हुई।
सुबह से रात तक कुछ खाया नहीं। पीने को पानी नहीं मिला। 06 किलोमीटर की दूरी तय कर घंटों बाद जब एयरपोर्ट पहुंचा तो भारतीयों की लंबी लाइन थी।
भारतीय वायु सेना पूरी कुशलता के साथ एक-एक कर भारतीय को निकाल रही है। हम सभी 3 बजकर 35 मिनट पर वहां से वायु सेना के विमान से अपने देश लौट आए। जब से नेपाल से वापस लौटे है, लोग वहां का मंजर पूछते है। जिसे याद करके ही रूह कांप जाता है।