अभी नहीं टला ताजमहल पर प्रदूषण का खतरा, 15 वर्ष से बने हुए हैं हानिकारक प्रदूषक तत्व
विश्व प्रसिद्ध ताजमहल पर प्रदूषण का खतरा पूरी तरह नहीं टला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े बताते हैं कि ताजमहल और उसके आसपास हानिकारक प्रदूषक तत्व पिछले 15 वर्ष से मामूली उतार-चढ़ाव के साथ एकसमान बने हुए हैं।
इनमें सल्फर डाइ ऑक्साइड (एसओटू) और नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड (एनओटू) जैसी गैसों से होने वाला प्रदूषण व पार्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद बारीक कण) शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वाहनों और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने के बावजूद ताजमहल और उसके आसपास प्रदूषण में बढ़ोतरी की रफ्तार बेहद सुस्त रही है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा है कि ताजमहल और उसके पास प्रदूषण निगरानी केंद्रों के आंकड़ों से यह साफ है कि वर्ष 2002 से 2016 तक एसओटू और एनओटू में बढ़ोतरी नहीं हैं।
नुनिहाई में एनओटू अपने तय मानकों से अधिक पाया गया
सिर्फ एक औद्योगिक क्षेत्र नुनिहाई में एनओटू अपने तय मानकों से अधिक पाया गया है। जबकि सभी जगहों पर पीएम-10 व एसपीएम कणों में बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह बढ़ोतरी की रफ्तार कम है।
वर्ष 2002 में ताजमहल प्रदूषण निगरानी केंद्र पर एसओटू पांच व एनओटू 22 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकार्ड किया गया था वहीं वर्ष 2016 में एसओटू और एनओटू क्रमश: चार और 18 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकार्ड किए गए।
इसके इतर पीएम-10 और एसपीएम वर्ष 2002 में क्रमश: 147 व 376 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थे वहीं वर्ष 2016 में इनकी मात्रा 168 व 315 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज हुई।
राज्य सरकार ने बताया, सात नवंबर 2000 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आगरा जिले में ताजमहल, एत्माददौला, राम बाग और औद्योगिक क्षेत्र नुनिहाई में प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों के जरिए प्रदूषण पर निगरानी रखी जा रही है। ये सभी क्षेत्र ताज ट्रॉपिज्म जोन में शामिल हैं।