स्वाइन फ्लू पीड़िता ने वेंटिलेटर पर जन्मा बच्चा
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स्वाइन फ्लू से पीड़ित एक गर्भवती ने जीवन रक्षक उपकरण के सहारे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। बच्चा गर्भ में पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था, इसलिए चिकित्सकों ने स्टेरॉयड देकर बच्चे के फेफड़े को विकसित किया। अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और जल्द अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
सर गंगा राम अस्पताल में 25 जनवरी को गंभीर रूप से स्वाइन फ्लू से पीड़ित एक गर्भवती को भर्ती कराया गया। महिला को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्हें जीवन रक्षक उपकरण के सहारे रखा गया।
महिला के गर्भ में 29 सप्ताह का बच्चा पल रहा था, इस वजह से बच्चे की जिंदगी को भी गंभीर खतरा था। बच्चे का फेफड़ा पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था इसलिए वैसी स्थिति में जन्म कराना मुश्किल था। लिहाजा चिकित्सकों ने स्टेरॉयड देकर बच्चे के फेफड़े को विकसित करने की योजना बनाई।
गर्भवती महिला को है ज्यादा खतरा
चेस्ट मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अरुप बासू ने बताया कि इन परिस्थतियों में कितना स्टेरॉयड देना है इसका आकलन करना भी बहुत जरूरी था, क्योंकि मात्रा ज्यादा होने से मां के जीवन को खतरा था।
गाइनोकोलॉजी विभाग की सीनियर कंसलटेंट डॉ. गीता मेंदीरत्ता ने बताया कि बच्चे को गर्भ में अभी 29 सप्ताह ही हुए थे इसलिए खतरा बना हुआ था। क्रिटिकल केयर विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. सुमित रे ने बताया कि गर्भवती को यदि स्वाइन फ्लू हो जाए तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आईसीयू पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं में मौत का आंकड़ा तीन गुना अधिक होता है।
डॉ. रे ने बताया कि यदि किसी गर्भवती को तीन दिन से अधिक से खांसी, सर्दी और जुकाम हो तो फौरन एच1एन1 जांच करानी चाहिए। जांच में किसी तरह की कोताही नहीं बरतें। बीमारी का पता लगते ही टेमीफ्लू दवा शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।