स्वामी चिन्मयानंद पर लगी हैं ये संगीन धाराएं, हो सकती है 10 साल तक की जेल
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पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayananda) को एसआईटी और यूपी पुलिस ने गिरफ्तार (Arrested) कर जेल भेज दिया गया है। एसआईटी की टीम स्वामी चिन्मयानंद को सुबह ट्रामा सेंटर ले गई थी। ट्रामा सेंटर में स्वामी को दिखाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।
जहां सीजेएम की अदालत ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ धारा 376 सी, 354डी, 342, और 506 के तहत केस दर्ज कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आइए जानते हैं क्या हैं ये गंभीर धाराएं जिनके चलते स्वामी चिन्मयानंद को 10 साल तक की कैद हो सकती है....
धारा 354घ आईपीसी (IPC Section 354D) - पीछा करना
भारतीय दंड संहिता की इस धारा में किसी लड़की या महिला का पीछा करने जैसी वारदातें शामिल हैं। जिसमें पहली बार अगर व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसको तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। अगर वह व्यक्ति दूसरी बार इस तरह की वारदात में दोषी पाया जाता है तो उसे पांच साल तक की कैद और जुर्माना भी हो सकता है।
आईपीसी धारा 376सी (IPC Section 376C)
जो भी व्यक्ति, धारा 376 के उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत दंडनीय अपराध करता है और इस तरह के अपराधिक कृत्य के दौरान लगी चोट एक महिला की मृत्यु या सदैव शिथिल अवस्था का कारण बनती है तो उसे एक अवधि के लिए कठोर कारावास जो कि बीस साल से कम नहीं होगा से दंडित किया जाएगा, इसे आजीवन कारावास तक बढ़ा या जा सकता है, जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सजा।
हालांकि यह धारा 4 भागों में बंटी है और चिन्मयानंद पर धारा 376सी लगाई गई है। जानिए इसका क्या है मतलब और कितनी होती है सजा...
376 (ग)
जब कोई अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, जेल, रिमांड होम, हिरासत के किसी अन्य स्थान, स्त्रियों या बालकों की संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक या अस्पताल का कर्मचारी होते हुए, ऐसी किसी स्त्री, जो उसकी हिरासत में है या उसके अधीन है या परिसर में उपस्थित है, उस स्त्री को अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उत्प्रेरित करने लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता है, तो उस व्यक्ति को पांच साल या दस साल की कारावास की सजा से दंडित किया जाता है और जुर्माने से भी दण्डित किया जा सकता है।
धारा 342 आईपीसी (IPC Section 342) - गलत तरीके से प्रतिबंधित करने के लिए दंड
अगर कोई किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा। यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है। यह अपराध पीड़ित व्यक्ति (जिसे परिरुद्ध किया गया है) द्वारा समझौता करने योग्य है।
धारा 506 आईपीसी (IPC Section 506) - धमकाना
अगर धमकी मृत्यु या गंभीर चोट आदि के लिए दी गई है और यदि धमकी मौत या गंभीर चोट पहुंचाने, या आग से किसी संपत्ति को जलाने के लिए, मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या सात वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या किसी महिला पर अपवित्रता का आरोप लगाने के लिए हो, तो अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध पीड़ित व्यक्ति के द्वारा समझौता करने योग्य है।
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