स्वच्छ सर्वेक्षण 2020: इंदौर को ‘सबसे स्वच्छ’ बनाने वाली पूर्व मेयर ने बताया, सफाई में क्यों फिसड्डी रह जाती है दिल्ली
- इंदौर की मेयर रहते हुए मालिनी गौड़ ने किया शानदार काम, नगर निगम को सबसे स्वच्छ होने का ईनाम दिलाया
- मालिनी गौड़ ने बताया बताया, नागरिक जागरूकता, सूखा-गीला कूड़ा अलग करना और बेस्ट ट्रीटमेंट प्लान से स्वच्छ बन सकती है दिल्ली
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केंद्र सरकार की तरफ से जारी स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में इंदौर ने लगातार चौथी बार पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली इस मामले में एक बार फिर फिसड्डी साबित हुई है। दिल्ली का कोई नगर निगम स्वच्छता के मामले में बड़ा मानक स्थापित नहीं कर सका है। एक लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरी नगर निगमों में नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) आठवें स्थान पर आया है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम 31वें स्थान पर, उत्तरी दिल्ली नगर निगम 43वें स्थान पर और पूर्वी दिल्ली नगर निगम 46वें स्थान पर आया है।
इंदौर को स्वच्छता के इस शानदार पथ पर ले जाने वाली उसकी पूर्व मेयर मालिनी गौड़ ने बताया कि उनके शहर के लोगों की जागरूकता के कारण ही शहर को यह मुकाम हासिल हुआ है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ लोग इसे एक राजनीतिक स्टंट समझकर उनका साथ नहीं देते थे, लेकिन जैसे ही इसका सकारात्मक असर आना शुरू हुआ, लोगों ने उनका साथ देना शुरू किया और धीरे-धीरे यह आदत में शुमार हो गया और उनका रास्ता आसान हो गया।
उन्होंने बताया कि शहर में खुले में हो रही शौच को रोकना उनके लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए वे सुबह पांच बजे ही चेकिंग अभियान पर निकल जाती थीं और ड्रम बजाकर लोगों को खुले में शौच से बचने के लिए प्रेरित किया जाता था। शुरुआत में लोगों को यह बेहद अटपटा लगता था, लेकिन जल्दी ही लोगों ने इसका महत्व समझा और खुले में शौच से मुस्क्ति मिल गई। शहर को स्वच्छ बनाने में यह बड़ा कदम साबित हुआ।
इंदौर मॉडल से स्वच्छ बन सकती है दिल्ली
मालिनी गौड़ ने कहा कि कूड़े के निबटान में सबसे बड़ी समस्या सूखे कूड़े को गीले कूड़े से अलग करने की होती है। लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित कराया कि घरेलू स्तर पर ही सूखा कूड़ा गीले कूड़े से अलग किया जाए। इससे गीले कूड़े से खाद बनाना संभव हुआ तो सूखे कूड़े की छंटाई कर उनसे उपयोगी चीजें निकालकर उनसे अच्छा काम लिया गया। यह नगर निगम के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बन गया।
उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली भी इसी तरह का मॉडल अपनाए, तो देश की राजधानी को भी इस पैमाने में टॉप पायदान पर लाया जा सकता है। अपनी दिल्ली यात्रा में भी उन्होंने सड़क किनारे कूड़े के अम्बार देखे हैं, इनके निस्तारण में नागरिक और प्रशासन के सहयोग के बिना स्वच्छता प्राप्त करना संभव नहीं है, इसके लिए नागरिकों का सहयोग बहुत आवश्यक है।
बड़ी आबादी के हिसाब से नहीं होते समाधान
शहरी मामलों के जानकार जगदीश ममगांई ने कहा कि दिल्ली की आबादी दो करोड़ तक पहुंच गई है, लेकिन इसकी स्वच्छता सेवाएं आज से चालीस वर्ष से पुराने तर्ज की हैं। यही कारण है कि दिल्ली को स्वच्छ बनाना एक चुनौतीपूर्ण काम बन गया है।
उन्होंने कहा कि किसी शहर को स्वच्छ रखना केवल नौकरी नहीं, बल्कि मिशन मोड में अंजाम दिए जाने वाला काम होता है, लेकिन नगर निगम अधिकारियों और प्रशासन इस मामले में पूरी तरह उदासीन है। नागरिकों का सहयोग न मिलना भी यह समस्या बढ़ाता है।
कूड़े से कबाड़ी बनता है लखपति तो निगम कंगाल क्यों?
एकीकृत नगर निगम के निर्माण समिति के अध्यक्ष जगदीश ममगांई के मुताबिक लोगों के घरों से निकलने वाले कूड़े को बेचकर कबाड़ी अच्छी कमाई कर सकता है, तो यही काम नगर निगम क्यों नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि पूर्वी दिल्ली की एक कालोनी के कूड़े को एक कंपनी को ठेका दिया गया था।
उलटे कंपनी ने सोसाइटी को 3.5 लाख रुपये देना तय किया था। लेकिन इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया। अन्यथा कूड़े ही नगर निगम की कमाई का अतिरिक्त जरिया बन सकते हैं। मालिनी गौड़ की बात से सहमती जताते हुए उन्होंने कहा कि सूखे कूड़े की छंटाई कर काफी नगर निगमों के द्वारा काफी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
लेकिन अभी यह व्यवस्था नहीं
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर निर्मल जैन ने बताया कि अभी उनके यहां सूखे कूड़े और गीले कूड़े को अलग करने का सिस्टम नहीं बनाया जा सका है। लेकिन गाजीपुर लैंड फिल साईट पर कचरे का प्रबंधन शुरू किए जा चुका है, जल्दी ही निगम अपने कुल उत्पादित कूड़े से अधिक की निस्तारण क्षमता प्राप्त कर लेगा।
लेकिन लगभग 16 हजार सफाई कर्मियों की बदौलत उन्होंने स्वच्छता रैंकिंग में अच्छा (240 से 46वां) सुधार किया है। वे इसे आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यहां काम का सही बंटवारा न होना भी एक बड़ी समस्या है। चार फुट से ज्यादा चौड़ी गलियां और 60 फुट से ज्यादा चौड़ी सड़कें पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, लेकिन वह अपना काम सही से पूरा नहीं करते जिससे क्षेत्र में गंदगी बरकरार रहती है।