दिल्लीः तीन दिन में हुआ 242 कंटेनमेंट जोन का सर्वे, कोरोना जांच में पांच गुना इजाफा
- केंद्रीय गृहमंत्री की लगातार बैठकों का दिखाई देने लगा असर
- 2 मार्च को पहला मरीज मिला था दिल्ली में, घर घर जाकर सर्वे है अनिवार्य
- 15 से 18 जून के बीच ढाई लाख लोगों का सर्वे कर दिया मेडिकल टीमों ने
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दिल्ली में कोरोना वायरस की लड़ाई अब जबदरस्त रूप ले चुकी है। रोजाना बैठक और एक बाद एक कई आदेश जारी होने के बाद अब तीन दिन में घर घर जाकर सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने राजधानी के कंटनेमेंट जोन में घर घर सर्वे करने के आदेश दिए थे जिसके बाद मंत्रालय ने 18 जून को सर्वे पूरा होने की पुष्टि की है। इस सर्वे में आईएलआई (फ्लू ग्रस्त) रोगियों और गंभीर सांस रोगी (सारी) की पहचान भी की गई है। हालांकि मंत्रालय ने अभी इन मरीजों की संख्या नहीं बताई है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार 22 जनवरी से देश में फ्लू ग्रस्त और गंभीर सांस रोगियों की जांच चल रही है। अभी तक दिल्ली में सामने आए परिणामोंके अनुसार हर तीसरा फ्लू ग्रस्त और हर पांचवां गंभीर सांस रोगी कोरोना संक्रमित मिल रहा है। दिल्ली में अब तक 13038 में से 2648 गंभीर सांस रोगी और 14,067 में से 5713 फ्लू रोगी कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। हालांकि इसमें फिलहाल संपन्न हुए सर्वे के आंकड़ें शामिल नहीं है। जानकारी के अनुसार सर्वे रिपोर्ट एक से दो दिन में सामने आने के बाद संक्रमित फ्लू और सांस रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
बीते रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली सरकार के साथ पहली और दूसरी बैठक एक ही दिन में संपन्न की। इसके बाद से शुक्रवार तक दिल्ली में रोजाना कोरोना जांच 20 हजार तक पहुंच चुकी है। वहीं घर घर जाकर सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में इलाज की कीमतों को भी तय कर दिया है। इसके अलावा कोविड अस्पतालों के कोरोना वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का काम भी पूरा हो चुका है।
तीन दिन में ऐसे कवर किए कंटेनमेंट जोन
शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में कुल कंटनमेंट जोन की संख्या 242 है। इनमें करीब 2.30 लाख आबादी रहती है। चूंकि कंटेनमेंट योजना के तहत बफर और कंटेनमेंट जोन के हर घर का सर्वे करना बेहद जरूरी है। ऐसे में गृहमंत्री के आदेश पर 15 जून से यह सर्वे शुरू हुआ और 18 जून तक खत्म हो गया।
कोरोना की जांच में पांच गुना इजाफा
इसी तरह अभी तक दिल्ली में रोजाना औसतन चार से साढ़े चार हजार सैंपल की जांच हो रही थी लेकिन बीते बृहस्पतिवार यह संख्या बढ़कर 20 हजार हो चुकी है जिसमें आरटी पीसीआर जांच ही 13 हजार हुई हैं। मंत्रालय का कहना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की लड़ाई अब बेहतर परिणामों की ओर बढने लगी है। 15 से 17 जून के बीच 27263 सैंपल की जांच हुई है जोकि अब तक प्रयासों में पहली बार है।
होम आइसोलेशन में नहीं रहना पड़ेगा मरीजों को
जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को होम आइसोलेशन की सुविधा समाप्त करते हुए तय आइसोलेशन स्थानों पर मरीजों को रखने के लिए कहा है। साथ ही कहा है कि अगर कोई मरीज पॉजिटिव आता है तो उसे कम से कम पांच दिन आइसोलेशन में रखा जाता सकता है।
दिल्ली सरकार की होम आइसोलेशन नीति के अनुसार कोरोना के जिन मरीजों में लक्षण नहीं होते हैं या कम लक्षण होते हैं, उन्हें अस्पताल में नहीं जाना पड़ता बल्कि उनका इलाज घर पर ही होता है। हालांकि इसकी अभी आधकिरिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि होम आइसोलेशन का मॉडल सबसे बेहतर है।
अगर इसे हटा दिया जाएगा तो दिल्ली में मरीजों के लिए फिर बिस्तरों की मारामारी शुरू हो जाएगी। बीते बृहस्पतिवार को जारी दिल्ली हेल्थ बुलेटिन के अनुसार राजधानी में अब तक 49,979 संक्रमित मरीज मिल चुके हैं।
दिल्ली सरकार ने आखिरी बार 17 जून के बुलेटिन में होम आइसोलेशन में मौजूद मरीजों की संख्या 25,020 बताई थी। जानकारी के अनुसार डीडीएमए की बैठक में गृह मंत्रालय के इन निर्देशों पर चर्चा हो सकती है जिसके बाद ही होम आइसोलेशन के भविष्य पर फैसला हो सकेगा।