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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Surprising reason for dispute between husband and wife in Indirapuram Ghaziabad

शादी के तीन साल बाद पत्नी में दिखी कमी: मर्जी से किया विवाह, दोनों का एक बच्चा भी...अलग होने की वजह जान सब दंग

Sat, 15 Jul 2023 10:39 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद। Published by: आकाश दुबे Updated Sat, 15 Jul 2023 10:39 AM IST
सार

मामले की सुनवाई इंस्पेक्टर मुनेश और काउंसलर आभा ठाकुर ने की। दोनों ने लड़के को समझाने की कोशिश की लेकिन वह तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद मामले को बंद कर दिया। 

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Surprising reason for dispute between husband and wife in Indirapuram Ghaziabad
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में पति-पत्नी के बीच अनबन का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पत्नी की लंबाई कम होने की वजह से पति उसके साथ नहीं रहना चाहता। शादी के तीन साल बाद पति को पत्नी की लंबाई कम होने से परेशानी होने लगी। परिवार परामर्श केंद्र में इंदिरापुरम निवासी महिला ने मामला दर्ज कराया कि उसका पति उसके साथ नहीं रहना चाहता क्योंकि उसकी लंबाई कम है।

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महिला ने बताया कि उनकी शादी को तीन साल हो गए है। उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की थी लेकिन अब पति उसके साथ नहीं रहना चाहता। दोनों का डेढ़ साल का बच्चा भी है। दोनों की दूसरी शादी है। अब पति को एक और शादी करनी है इसलिए वह मेरे साथ नहीं रहना चाहता। पति ने कहा कि पत्नी ने मेरे मां बाप के लिए उलटा सीधा बोला है। जिस पर पत्नी माफी मांगने को तैयार भी हो गई लेकिन पति बिल्कुल भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

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मामले की सुनवाई इंस्पेक्टर मुनेश और काउंसलर आभा ठाकुर ने की। दोनों ने लड़के को समझाने की कोशिश की लेकिन वह तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद मामले को बंद कर दिया। परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी नेहा चौहान ने कहा कि काउंसलर्स ने समझौता कराने की कोशिश की लेकिन लड़का तैयार नहीं हुआ। केंद्र मे केवल समझाने का काम किया जा सकता है। किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती।

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परामर्श केंद्र में मामले आने हुए कम
केंद्र में पिछले एक महीने से बहुत कम मामले आ रहे हैं। एक दिन में प्रत्येक चैंबर के पास केवल आठ से 10 फाइलें आती हैं। कई बार तो पांच-छह फाइलें ही आती है। एक या दो बजे तक सभी की काउंसिलिंग हो जाती है, जिसके बाद केंद्र में कोई काम नहीं होता। परामर्श केंद्र प्रभारी नेहा चौहान ने बताया कि पहले 30 से 35 फाइलें आती थी, जिसमें पांच बजे तक काउंसिलिंग खत्म करना मुश्किल हो जाता था।

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