गर्भ से शिशु को आधा बाहर निकालकर ऑपरेशन, दुर्लभ सर्जरी में डॉक्टरों को मिली सफलता
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भारतीय चिकित्सा जगत में एक और कीर्तिमान राजधानी के डॉक्टरों ने जोड़ा है। बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए गर्भ से शिशु का आधा शरीर बाहर निकालकर एक लंबी सर्जरी प्रक्रिया पूरी की।
इसके बाद एक शिशु को दुनिया में लेकर आए। बताया जा रहा है कि एम्स के बाद इस तरह की दुर्लभ सर्जरी का दूसरा मामला है। एम्स में सर्जरी के बाद शिशु की मौत हो गई थी।
बिहार निवासी 29 वर्षीय महिला को गर्भ धारण के 5 माह बाद मेडिकल जांच में पता चला कि भ्रूण में मौजूद शिशु की गर्दन सामान्य से ज्यादा बड़ी है। बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफर करने पर यहां एमआरआई में इसकी पुष्टि हो गई।
इस तरह किया ऑपरेशन
इसमें पता चला कि गर्भस्थ शिशु की बड़ी गर्दन का द्रव्यमान अनुमानित रूप से 10 गुणा 9 सेमी का है। उसकी श्वसन क्रिया को यह द्रव्यमान बाधित कर रहा है, जिसकी वजह से श्वास नली दिख नहीं रही है।
ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने एक्स्ट्रा यूटेरिन इंट्रा पार्टम ट्रीटमेंट (एक्जिट) नामक दुर्लभ प्रक्रिया के जरिये शिशु को जीवन दिया। सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रशांत जैन ने बताया कि शिशु का सामान्य प्रक्रिया से प्रसव कराना उसके लिए जानलेवा हो सकता था।
क्योंकि गर्दन के द्रव्यमान ने श्वास नली को पूरी तरह ब्लॉक कर रखा था। ऐसे में ‘एक्जिट’ प्रक्रिया ही इकलौता विकल्प था।
बच्चे के शरीर के ये हिस्से निकाले गए गर्भ से बाहर
न्यूनोटोलॉजी विभाग के कंसलटेंट डॉ. कुमार अंकुर ने बताया कि इस केस में विशेष सी-सेक्शन जरूरी था। ताकि फीटो-प्लेसेंट्रल सर्कुलेशन को जारी रखा जा सके।
यह यूटेरिन रिलेक्सेंट्स के साथ सामान्य एनेस्थेसिया के साथ ही संभव था। लेकिन इसमें मां को ब्लीडिंग होने का खतरा भी बहुत ज्यादा था। इसलिए सिर्फ सिर और कंधा ही गर्भाशय से निकाला गया।
इनट्यूबेशन प्रक्रिया 1 मिनट 32 सेकंड के रिकॉर्ड समय के साथ पूरी की गई। सी-सेक्शन और प्रसव के बाद जायंट सर्वाइकल लिम्फान्गियोमा का हर कदम सटीक था और नतीजा भी संतोषजनक रहा। शिशु अब बिना किसी अवरोध के सुरक्षित तरीके से श्वास ले पा रहा है।