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इसे देखने के बाद आप भूल जाएंगे टीवी सीरियल
ओम प्रकाश/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 28 Jan 2014 03:36 PM IST
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फरीदाबाद में 1 फरवरी से शुरू हो रहे 28वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में बनाए जा रहे लगभग आधा दर्जन मंचों पर शास्त्रीय एवं लोक नृत्य संगीत को बचाने की कोशिश होगी।
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पॉप गीत-संगीत एवं वेस्टर्न डांस पर झूमने वाली नई पीढ़ी को लोक वाद्ययंत्रों पर थिरकाया जाएगा।
विदेशी भी झूमेंगे और मेले के माध्यम से मनोरंजन एवं पूजापाठ के लिए किए जाने वाले नृत्य-संगीत से रूबरू होंगे। इन मंचों पर देश की सांस्कृतिक विविधता व विरासत दिखेगी। इतने डांस और इतने वाद्य यंत्रों के रिदम होंगे कि आप डांस इंडिया डांस और नच बलिये जैसे टीवी शो भूल जाएंगे।
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इस बार यहां कई राज्यों के विश्व प्रसिद्ध लोकनृत्यों कत्थक, कुचिपुड़ी, लावणीं, बीहू, जुमूर डांस, गरबा, छाऊ, चारकुला, मयूर नृत्य, बरसाना होली, डांडिया, कच्चीघोड़ी, कालबेलिया, संभलपुरी एवं कठपुतली नृत्य पेश किए जाएंगे।
नाट्यशाला में थीम स्टेट गोवा एवं कंट्री पार्टनर श्रीलंका से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुखता से होंगे। एक तरह से पूरे मेले को फोक डांस फ्लोर में बदलने की कवायद है, ताकि लुप्त हो रहे इन नृत्यों से लोग रूबरू हो सकें।
उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान की ओर से यहां वैले पेश किए जाने की संभावना है। मेजबान राज्य हरियाणा का मशहूर नृत्य बंचारी तो होगा ही, जिसके नगाड़े की आवाज पर बड़े-बड़े वेस्टर्न डांस करने वाले भी थिरकने से खुद को रोक नहीं पाते। यहां पर सबसे ज्यादा जोश भरा डांस सात सौ पुरानी सभ्यता का सिद्धिगोमा होगा।
श्रीलंका और गोवा में होने का होगा एहसास
मेले के सार्क जोन को श्रीलंका विलेज के रूप में तैयार किया जा रहा है। चौपाल के आसपास आर्टिफिशियल नारियल के पेड़ लगाकर इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है ताकि सैलानियों को श्रीलंका में होने का एहसास हो। कंट्री पार्टनर श्रीलंका एवं थीम स्टेट गोवा दोनों जगहों का मिला जुला माहौल बनाने के लिए गेटों को सीप, मछली एवं नारियल के पेड़ों की आकृति से सजाया जा रहा है। गेटों एवं हट्स को समुद्र के रंग यानी नीले में पेश किया जा रहा है।