{"_id":"63967bd235e0306e7ef6a0e090d5e876","slug":"surajkund-fair-in-faridabad-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूरजकुंड मेला: चूड़ियां और लैंप शेड बनी लोगों के आकर्षण का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूरजकुंड मेला: चूड़ियां और लैंप शेड बनी लोगों के आकर्षण का केंद्र
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 04 Feb 2016 07:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कलाकारों की सुंदर शिल्पकारी और धागों के ताने-बाने से बनी चीजें दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। ऐसा ही नजारा सूरजकुंड शिल्प मेले के स्टाल नंबर-185 पर देखने को मिल रहा है।
थीम स्टेट तेलंगाना के जिला वारंगल से आई शिल्पी बी.स्वरूपा ने अपनी हाथ की कारीगरी पेश की है। स्वरूपा कहती हैं कि यह पुश्तैनी कला उनके साथ आए हुए 57 वर्षीया अपने पिता पिट्टारामलू से 21 वर्ष की आयु में उस समय सीखी जबकि उनकी शादी बी. नरसैया से हुई।
वह बचपन से पिता को घर में हैंडलूम पर दरियां बनाने के लिए बाजार से धागा लाकर उन पर नेचुरल डाई करके इस कारीगरी को करते हुए देखती थी। स्वरूपा ने यह हुनर पिता से सीखा और फिर पति नरसैया को भी सिखाया।
विज्ञापन
वह अपनी मनभावन दरी को हैदराबाद, मुंबई व दिल्ली हाट के अलावा विदेशी खरीदारों के माध्यम से भी बेचते हैं।\
तीन मिनट में बन जाती हैं लाह की चूड़ियां
अगर आप सूरजकुंड मेले में आ रहे हैं तो घरों में सजावट के लिए मात्र डेढ़ मिनट में लैंप शेेड और तीन मिनट में रंगबिरंगी चूड़ियां बनवाकर ले जा सकते हैं।
झारखंड और चंडीगढ़ से आए शिल्पकार मेले में दर्शकों को अपनी शिल्पकारी से लुभा रहे हैं। झास्कोलैंप संस्था के बैनर तले मेले में आए शिल्पकार झाबरमल, नोडल आफि सर अर्चना गोठी व शीश मोहसिन ने बताया कि कुसुम, प्लाश और बैर के पौधे से लाह निकाली जाती है और उसे एकत्र करके पानी में धोकर लाह का निर्माण किया जाता है।
उसे गलाकर ही चूड़ियां बनाई जाती है। मेले में आए शिल्पकार महिलाओं को तुरंत चूड़ियां बनाकर दे रहे हैं। झाबरमल ने बताया कि एक सेट चूड़ी बनाने में केवल तीन मिनट समय लगता है।
सबसे अधिक मांग शादी के चूड़ी सेट की है। वह इस शिल्पकारी में वर्ष 2011 में नेशनल अवार्ड जीत चुके हैं। वहीं चंडीगढ़ से आए शिल्पकार दिलबाग सिंह डेढ़ मिनट में डेकोरेशन के लिए लैंप शेेड बनाकर तैयार कर देते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले ये सामान थाईलैंड बेचा करता था और महंगे दाम में। देश के वह पहले शिल्पकार हैं जो इस उत्पाद को तैयार कर बेचना शुरू किया है। उनका मकसद मेड इन इंडिया को बढ़ावा देना है।
विज्ञापन
थीम स्टेट तेलंगाना के जिला वारंगल से आई शिल्पी बी.स्वरूपा ने अपनी हाथ की कारीगरी पेश की है। स्वरूपा कहती हैं कि यह पुश्तैनी कला उनके साथ आए हुए 57 वर्षीया अपने पिता पिट्टारामलू से 21 वर्ष की आयु में उस समय सीखी जबकि उनकी शादी बी. नरसैया से हुई।
विज्ञापन
वह बचपन से पिता को घर में हैंडलूम पर दरियां बनाने के लिए बाजार से धागा लाकर उन पर नेचुरल डाई करके इस कारीगरी को करते हुए देखती थी। स्वरूपा ने यह हुनर पिता से सीखा और फिर पति नरसैया को भी सिखाया।
विज्ञापन
वह अपनी मनभावन दरी को हैदराबाद, मुंबई व दिल्ली हाट के अलावा विदेशी खरीदारों के माध्यम से भी बेचते हैं।\
तीन मिनट में बन जाती हैं लाह की चूड़ियां
अगर आप सूरजकुंड मेले में आ रहे हैं तो घरों में सजावट के लिए मात्र डेढ़ मिनट में लैंप शेेड और तीन मिनट में रंगबिरंगी चूड़ियां बनवाकर ले जा सकते हैं।
झारखंड और चंडीगढ़ से आए शिल्पकार मेले में दर्शकों को अपनी शिल्पकारी से लुभा रहे हैं। झास्कोलैंप संस्था के बैनर तले मेले में आए शिल्पकार झाबरमल, नोडल आफि सर अर्चना गोठी व शीश मोहसिन ने बताया कि कुसुम, प्लाश और बैर के पौधे से लाह निकाली जाती है और उसे एकत्र करके पानी में धोकर लाह का निर्माण किया जाता है।
उसे गलाकर ही चूड़ियां बनाई जाती है। मेले में आए शिल्पकार महिलाओं को तुरंत चूड़ियां बनाकर दे रहे हैं। झाबरमल ने बताया कि एक सेट चूड़ी बनाने में केवल तीन मिनट समय लगता है।
सबसे अधिक मांग शादी के चूड़ी सेट की है। वह इस शिल्पकारी में वर्ष 2011 में नेशनल अवार्ड जीत चुके हैं। वहीं चंडीगढ़ से आए शिल्पकार दिलबाग सिंह डेढ़ मिनट में डेकोरेशन के लिए लैंप शेेड बनाकर तैयार कर देते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले ये सामान थाईलैंड बेचा करता था और महंगे दाम में। देश के वह पहले शिल्पकार हैं जो इस उत्पाद को तैयार कर बेचना शुरू किया है। उनका मकसद मेड इन इंडिया को बढ़ावा देना है।