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सूरजकुंड मेला: मुख्य चौपाल पर छऊ मुखौटा और ढोकरा मूर्ति करेंगी स्वागत
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:04 AM IST
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सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेले की मुख्य चौपाल में आने वाले मेहमानों का स्वागत विशाल छऊ मुखौटा और ढोकरा मूर्तियां करेंगी। पौराणिक कथाओं पर आधारित छऊ नृत्य में इस्तेमाल होने वाले मुखौटे और धातु की हस्तशिल्प से तैयार मूर्तियां मुख्य चौपाल को झारखंड के लोक और सांस्कृतिक जीवन का रंग देंगी।
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अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में मुख्य चौपाल की पृष्ठभूमि (बैकड्रॉप) को थीम स्टेट की एतिहासिक, सांस्कृतिक या भौगोलिक विशेषता दर्शाने वाले स्थल या वस्तु की प्रतिकृति से सजाया जाता है। इस बार झारखंड को थीम स्टेट का दर्जा मिला है।
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मुख्य चौपाल की पृष्ठभूमि में छऊ मुखौटा और ढोकरा मूर्तियों की प्रतिकृति सजाई जाएंगी। मेला परिसर को झारखंड की सामाजिक सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशेषताओं से सराबोर करने के लिए इसकी दीवारें सोहराई पेंटिंग से सजाई जा रही हैं।
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राज्य की संथाल जनजाति अपने घरों की दीवार पशु, पक्षी, पेड़-पौधे आदि प्राकृतिक वस्तुओं के चित्र बना कर सजाते हैं, इन्हें ही सोहराई चित्रकला कहा जाता है। इसके अलावा मेला परिसर को दुमका जिले के ग्रामीण इलाकों में घर-घर बनाई जाने वाली जादो पटिया चित्रकला से सजाया जाएगा।
ग्रामीण जीवन, आपसी रिश्तों पर आधारित यह चित्रकला झारखंड की विशेषता है। परिसर की सजावट कर रही पीएचडी चेंबर ऑफ कामर्स की रीफत रसूल ने बताया कि मेले में झारखंड राज्य की विशेषताएं चारों ओर नजर आएंगी, इसकी तैयारी जोरों पर चल रही है।
ईको फ्रेंडली होगी छोटी चौपाल
फरीदाबाद। जहां मुख्य चौपाल झारखंड के सांस्कृतिक जीवन की झलक दिखाएगी वहीं छोटी चौपाल पर राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन होंगे। छोटी चौपाल को झारखंड के राजकीय वृक्ष साल के पत्तों और सबई घास से सजाया जाएगा। राजकीय फूल पलाश का रंग भी छोटी चौपाल पर अपनी चमक बिखेरेगा। पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स की रीफत रसूल ने बताया कि छोटी चौपाल सरकार के पर्यावरण संरक्षण की थीम पर ईको फ्रेंडली बनाई जा रही है।
संथाल परिवार की जीवनशैली से होंगे रूबरू
मेला परिसर में बन रहा झारखंड का अपना घर राज्य की संथाल जाति की जीवनशैली का नजारा प्रस्तुत करेगा। अपना घर में संथाल परिवार बसाया जा रहा है। पंद्रह दिन के मेले में दर्शक इस घर में जाकर संथाली रहन सहन, खान-पान, जीवन शैली से रूबरू होंगे। संथाली परिवार अपना घर में ठीक उस तरह रहेगा जिस तरह वह अपने गांव के घर में रहता है।