दिल्ली सरकार के सुस्त रवैये पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, 13 एंट्री प्वाइंट पर RFID लगाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स के अलावा एंट्री टैक्स (पर्यावरण शुल्क) वसूलने के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस(आरएफआईडी) लगाने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने इस लेकर दिल्ली सरकार के सुस्त रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरएफआईडी जैसी उत्तम तकनीक के प्रयोग में देरी पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा ‘हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आपने इसे क्यों नहीं लगाया।
आपको इस बारे में सुझाव दिए गए थे लेकिन आप कुछ नहीं कर रहे हैं। पूरा विश्व आरएफआईडी सिस्टम को अपना रहा है। आपको प्रोग्रेसिव होना चाहिए। आपको भविष्य और आगे की सोचनी चाहिए न कि आपको इसमें बाधा बनना चाहिए।’
प्रोजेक्ट को लागू करने का जिम्मा दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को सौंपा
इस प्रोजेक्ट को लागू करने का जिम्मा दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिस्टम में बदलाव और प्रगति होनी चाहिए। हम 21 वीं शताब्दी में हैं। पीठ ने कहा कि लंदन में पिछले 100 वर्षों से मेट्रो ट्रेन है।
शीर्ष अदालत दिल्ली में वायु प्रदूषण से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में अदालत की मदद के लिए नियुक्त अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील साल्वे ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण(इपका) ने आरएफआईडी सिस्टम के गुणवत्ता को लेकर परीक्षण किया था, जिसमें इसे उपकर और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूलने के लिए बेहद कारगर बताया गया था।
पीठ ने कहा कि दिल्ली में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों से वसूल किए शुल्क का इस्तेमाल 13 एंट्री प्वाइंट पर आरएफआईडी लगाने में होगा। पीठ ने दिल्ली सरकार को इस प्रोजेक्ट को लेकर निविदा संबंधी बातों के परीक्षण के लिए आरआईटीईएस (राइट्स) को 93 लाख रुपये बतौर फीस देने के लिए कहा है। सरकार को फीस की यह रकम छह हफ्ते के भीतर जारी करने का निर्देश दिया गया है।