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भंग होगी दिल्ली विधानसभा, जल्द होंगे चुनाव!

Fri, 18 Apr 2014 07:37 AM IST
Updated Fri, 18 Apr 2014 07:37 AM IST
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supreme court left the decision on president and lg

एक ओर जहां पूरा देश लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में व्यस्त है वहीं दूसरी ओर दिल्ली में एक बार फिर से विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने वाला है।

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दिल्ली में 49 दिनों तक चली आम आदमी पार्टी की सरकार ने उपराज्यपाल को इस्तीफा देकर विधानसभा भंग करने की मांग की थी लेकिन उपराज्यपाल ने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
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इसके खिलाफ AAP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और दिल्ली विधानसभा भंग कर फिर से चुनाव कराने की मांग की थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सरकार बनाने की संभावना पर बीजेपी और कांग्रेस से जवाब तलब किया था।

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राष्ट्रपति करेंगे चुनाव पर फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली में नए सिरे से चुनाव का रास्ता साफ करने को विधानसभा भंग करने में राष्ट्रपति और उपराज्यपाल (एलजी) के सामने कोई कानूनी बाधा नहीं है।

जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में वह कोई निर्देश नहीं जारी कर रही है और यह राष्ट्रपति पर है कि वह तथ्यों और परिस्थिति के आधार पर फैसला करें। इस पीठ में जस्टिस कुरियन जोसेफ भी थे।

पीठ ने कहा कि हम स्पष्ट करते हैं कि 16 फरवरी की घोषणा को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति पर कोई बाधा या बंधन नहीं है।

'आया राम-गया राम, को न मिले बढ़ावा'

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शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि हम सिर्फ कानूनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। क्या करना है तथा किस प्रकार करना है इसका फैसला राष्ट्रपति की ओर से किया जाना है।

सर्वोच्च अदालत की ओर से आदेश जारी किए जाने के पहले कांग्रेस, भाजपा और AAP के वकीलों ने इस मुद्दे पर सहमति जताई कि घोषणा वापस लेने में राष्ट्रपति और उपराज्यपाल के सामने कोई बाधा नहीं है।

पीठ ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे विधानसभा में आया राम-गया राम को बढ़ावा मिलता हो। पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति और उपराज्यपाल की कार्रवाई सही थी या नहीं, वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही।

AAP ने दी थी चुनौती

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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार लोगों का वैसा ही अधिकार है जैसा कोई अन्य अधिकार।

अदालत में आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल सरकार के पद छोड़ने देने के बाद दिल्ली विधानसभा भंग नहीं किए जाने के फैसले को चुनौती दी गयी है।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने 70 सदस्यीय विधानसभा को भंग किए जाने का समर्थन नहीं किया था और विधानसभा को निलंबित स्थिति में रखा गया। हालांकि केजरीवाल सरकार ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी।

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