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Supreme Court: नोएडा भूमि घोटाले के सह आरोपियों के खिलाफ केस चलाने का निर्देश, रद्द किया ट्रायल कोर्ट का आदेश

Wed, 18 Mar 2026 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 18 Mar 2026 06:25 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जो हाईकोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या के आधार पर पारित किया गया था।

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Supreme Court: Instructions to prosecute co-accused in Noida land scam
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा भूमि घोटाले से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का आदेश सिर्फ उस आरोपी पर लागू होता है जिसने अदालत का रुख किया था। यह आदेश अन्य सह-आरोपियों पर स्वतः लागू नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जो हाईकोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या के आधार पर पारित किया गया था।

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जस्टिस आह्वानुदीन अमानुल्लाह और जस्टिस  के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की गलत समझ के कारण ट्रायल कोर्ट में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसका लाभ उठाकर अन्य सह-आरोपियों ने भी राहत पाने का प्रयास किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील धनंजय जैन ने कहा कि यह किसानों के हक से जुड़ा मामला है। किसानों को भूमि कौड़ियों के भाव में ले ली गई थी। यह मामला चिटहेरा गांव की लगभग 300 बीघा जमीन से जुड़े कथित अवैध लेनदेन का है।
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आरोप है कि किसानों पर दबाव डालकर उनकी जमीन बहुत कम कीमत पर खरीद ली गई। इस संबंध में वर्ष 2022 में गौतम बुद्ध नगर में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी (धारा, उगाही और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए थे।
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ट्रायल कोर्ट को अनावश्यक व्याख्या संबंधी मुद्दे उठाने से बचना चाहिए
साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को अनावश्यक व्याख्या संबंधी मुद्दे उठाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो सकती है। अदालत ने सह-आरोपियों द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं को किसी अन्य पीठ के समक्ष रखने और तीन महीने के भीतर उनका निपटारा करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह पूछा कि कथित तौर पर किसानों से ली गई जमीन के संबंध में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या विवादित बिक्री विलेखों को रद्द करने या प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए कोई कार्रवाई की गई है।


दिसंबर में हाईकोर्ट ने एक आरोपी को दी थी राहत
दिसंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी मालू की याचिका पर उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था। इसके बाद अन्य आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट में दलील दी कि जब पूरी कार्यवाही रद्द हो चुकी है तो इसका लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए। ट्रायल कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को गलत ठहराते हुए कहा कि हाईकोर्ट का आदेश केवल उस आरोपी के लिए था जिसने अदालत में अपील की थी। इसलिए ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अदालत ने मालू को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही फिर से शुरू करने का निर्देश दिया।
 

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