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SC ने इन्हें दिया जोर का झटका

Thu, 23 Jan 2014 10:53 AM IST
दिलीप चतुर्वेदी/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
दिलीप चतुर्वेदी/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Thu, 23 Jan 2014 10:53 AM IST
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supreme court gives verdict in farmers favor

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को किसानों को दिए आश्वासन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को जबरदस्त झटका दिया है। यह झटका नोएडा एक्सटेंशन के बिल्डरों के अलावा वायर्स के लिए भी झन्नाटेदार है। यही नहीं उन किसानों में भी सन्नाटा पसर जाएगा, जो मुआवजे का बड़ा हिस्सा किसी न किसी कार्य में खर्च कर चुके हैं।

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हां इस आश्वासन पर खुश होने वाले भी कम नहीं हैं। जिन्होंने अभी तक मुआवजा नहीं उठाया है। या फिर वे अपनी जमीन को नहीं देना चाहते, उनके लिए यह आश्वासन किसी बरदान से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई में किसानों की इस बात को तो नहीं माना कि यथा स्थिति के आदेश दे दिए जाएं, लेकिन अदालत का यह कहना ही बहुतों की सांस ऊपर-नीचे कर गया है कि अगर किसानों के पक्ष में फैसला आया तो जमीन उन्हें वापस मिलेगी।
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लगभग 70 प्रतिशत किसान अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा उठा चुके हैं। हालांकि ऐसे किसान भी हैं, जिन्होंने मुआवजा नहीं उठाया। ऐसे किसानों की संख्या भी कम नहीं है जो मुआवजा उठाने के बाद भी अदालत चले गए हैं।
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अगर किसान संगठनों को देखा जाए तो ज्यादातर संगठन इस बात के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं कि उन्हें 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए, आबादी नियमावली पर प्रदेश सरकार फैसला करे। अब सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई ने इस मामले की दिशा ही बदल दी है।

अगर ऐसा हुआ तो...
अगर अधिग्रहण रद्द होता है तो उन किसानों के समक्ष संकट पैदा हो जाएगा, जो मुआवजा उठा चुके हैं और मुआवजे का बड़ा हिस्सा किसी न किसी कार्य में खर्च कर चुके हैं। कई किसानों को मुआवजा भी करोड़ों में मिला है। अगर उसका बड़ा हिस्सा उन पर खर्च हो गया तो उनके सामने संकट यह होगा कि अधिग्रहण रद्द होने पर वह प्राधिकरण को यह राशि कहां से चुकाएंगे।

क्या जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में मिल जाएगी?
नोएडा एक्सटेंशन में करीब साढे़ तीन लाख फ्लैट बिल्डरों के हैं। जमीन अधिग्रहण का फैसला अगर होता है तो ऐसे तमाम लोगों की जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में चली जाएगी, जिन्होंने आशियाने का सपना पूरा करने के लिए एक्सटेंशन के किसी न किसी बिल्डर के यहां फ्लैट बुक करा रखा है। बहुत से लोगों ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च कर दिया है। विवाद के चलते उन्हें थोड़ी उम्मीद तो है कि उनके आशियाने का सपना पूरा होगा, लेकिन अधिग्रहण रद्द हुआ तो वह पैसा वापस मिलेगा या नहीं, मिलेगा तो कब तक? यह अपने आप में सवाल है।


क्या बिल्डर भी डूबेंगे?
अधिग्रहित की गई जमीन किसानों को वापस करने का फैसला अगर भविष्य में होता है तो बिल्डर भी डूब जाएंगे। एक्सटेंशन में लगभग दो दर्जन बिल्डरों की योजनाएं चल रही हैं। जहां बहुमंजिली  इमारतों का निर्माण चल रहा है। हालांकि अभी तक लोगों के पैसे से ही निर्माण कार्य चल रहा है। अगर जमीन अधिग्रहण रद्द होता है और लोगों को पैसा वापस करना पड़ा तो बिल्डरों का लोहा सीमेंट मिट्टी में मिल जाएगा।

कौन-कौन से गांव होंगे प्रभावित?
इकहरा, हैवतपुर, रौजा, छोटी मिलक, बिसरख, खैरपुर, ऐमलाबाद, खोदना, तुसियाना, चौगानपुर, साबेरी आदि।

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