फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Supreme court criticize gautam budh nagar administration in case of not admitting pregnant lady in hospital and isolation rules

गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं करने के मामले में गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की सुप्रीम कोर्ट में आलोचना

Wed, 17 Jun 2020 06:25 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 17 Jun 2020 06:25 PM IST
विज्ञापन
Supreme court criticize gautam budh nagar administration in case of not admitting pregnant lady in hospital and isolation rules
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के अस्पतालों में जगह नहीं मिलने की वजह से एक गर्भवती महिला की मृत्यु होने की घटना को गंभीरता से लिया और प्रशासन से कहा कि इससे इंकार करने का औचित्य नहीं है। शीर्ष अदालत ने जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उसके यहां पृथक-वास के बारे में राष्ट्रीय दिशानिर्देशों से अलग दिशा निर्देश नहीं हों।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हये उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन


जिले के अस्पताल में बिस्तर के लिए भटकती एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो जाने संबंधी खबर का जिक्र करते हुये पीठ ने कहा, इससे इंकार करने के मूड में मत रहिये कि वहां कोई समस्या नहीं है। न्यायालय ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस मामले में गौर करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


न्यायालय ने 12 जून को कोविड-19 महामारी के बीच नोएडा प्रशासन द्वारा संस्थागत पृथक-वास पर जारी दिशा-निर्देशों के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को जानकारी देने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के विपरीत कोई दिशा निर्देश नहीं हो सकता है। न्यायालय का मानना था कि राष्ट्रीय या राज्य के दिशानिर्देशों से अलग कोई भी निर्देश अव्यवस्था का कारण बन सकता है।

शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आवागमन के पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस संबंध में ‘‘पूरी जानकारी’’ देने के लिए कहा था कि क्या नोएडा में बिना लक्षणों वाले लोगों को संस्थागत पृथक-वास में या घर पर पृथक रखा गया है या नहीं।

पीठ ने अपने आदेश में कहा था, यह भी हमारे ध्यान में लाया गया है कि जिला मजिस्ट्रेट, नोएडा द्वारा जारी किए गए कुछ दिशा निर्देश राष्ट्रीय दिशानिर्देशों और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।

न्यायालय ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने के लिये कहा था कि राज्य अपने यहां राष्ट्रीय दिशा निर्देशों का उल्लंघन नहीं करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अधिकारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।


केंद्र ने पीठ को बताया था कि गृह सचिव ने एनसीआर में आवाजाही पर प्रतिबंध के मुद्दे से निपटने के लिए नौ जून को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्य सचिवों के साथ संयुक्त बैठक की थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि दिल्ली और हरियाणा की सीमाओं पर कोई बाधा नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश ने कुछ मुद्दों को उठाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed