{"_id":"5baad234867a557eae2defb9","slug":"sunanda-pushkar-case-police-kept-their-aspect-to-high-court-in-advance-bail-of-shashi-tharoor","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुनंदा पुष्कर मौत मामला: हाईकोर्ट में पुलिस ने शशि थरूर की अग्रिम जमानत मामले में रखा यह तर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुनंदा पुष्कर मौत मामला: हाईकोर्ट में पुलिस ने शशि थरूर की अग्रिम जमानत मामले में रखा यह तर्क
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 26 Sep 2018 05:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को कोर्ट पर भरोसा करते हुए उसी अदालत के समक्ष पेश होना चाहिए था, जहां से उन्हें समन जारी हुआ था। पेशी से पहले ही उन्होंने अग्रिम जमानत ले ली, जो सही नहीं। यह तर्क दिल्ली पुलिस ने उस याचिका पर सुनवाई में दिया, जिसमें शशि थरूर को मिली अग्रिम जमानत को चुनौती दी गई है। याचिका पर जिरह के लिए 9 अक्तूबर की तारीख तय की गई है।
विज्ञापन
मालूम हो कि सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने 14 मई, 2018 को थरूर के खिलाफ दहेज हत्या व खुदकुशी के लिए उकसाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने इस चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद थरूर को बतौर आरोपी समन जारी किया था। जस्टिस आरके गाबा के समक्ष दिल्ली पुलिस की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी। राहुल मेहरा ने कोर्ट के समक्ष कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद शशि थरूर का अग्रिम जमानत लेना सही नहीं था, उन्हें कोर्ट पर भरोसा करना चाहिए था।
विज्ञापन
दिल्ली पुलिस ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा तो वह हर आदमी जिसे समन जारी होगा, जमानत के लिए ऊपरी अदालत के समक्ष पहुंच जाएगा। थरूर ने कानूनी प्रक्रिया का मजाक बनाया, इसलिए वह इस याचिका का समर्थन करते हैं। हालांकि याची को यह अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
वहीं थरूर की ओर से हाईकोर्ट पहुंचे उनके वकील विकास पाहवा ने दिल्ली पुलिस के तर्क का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जब चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी पुलिस ने रिमांड ले ली या फिर कोर्ट ने ही आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ऐसी आशंका इस मामले में भी थी, इसलिए अग्रिम जमानत के लिए सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। सत्र अदालत में अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया था। इससे साफ है कि उनके मुव्वकिल को हिरासत में लिए जाने की आशंका थी।