गर्मी ने तोड़ा अप्रैल महीने में 13 साल का रिकॉर्ड
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गर्मी और लू के कहर से मंगलवार को साइबर सिटी खूब तपी। सूर्य के कड़े तेवर ने 13 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा, जो सामान्य से करीब सात डिग्री सेल्सियस अधिक थी। जबकि साल 2003 में अप्रैल महीने में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके बाद इस साल यह सबसे अधिक गर्मी है। दिल्ली-एनसीआर में इस साल सबसे अधिक गर्म गुडग़ांव दर्ज हो रहा है।
गर्मी का सितम दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। सोमवार से तेज हवाओं के चलने की उम्मीद थी, लेकिन मंगलवार सुबह से ही लू चलने लगी थी। झुलसाती धूप के रूप में आसमान से आग बरस रही है और तेज चलती लू झुलसा रही है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मौसम की इस मार से फिलहाल राहत की कोई उम्मीद भी नहीं है। अगले एक सप्ताह तक यह 44 डिग्री सेल्सियस के करीब बने रहने की संभावना है। बढ़ता तापमान लोगों की परेशानी का सबब है।
मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को साइबर सिटी में अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जो सामान्य से पांच डिग्री कम है। करीब नौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं दोपहर तक 13 किलोमीटर प्रति घंटे हो गई। जिससे लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि फरीदाबाद में 39.7 डिग्री, दिल्ली के पालम में 42.2 डिग्री और दिल्ली के अन्य जगहों पर 41 डिग्री के करीब है।
जिले में पिछले कई दिनों से पड़ रही शदीद गर्मी की वजह से जनजीवन बेहाल है और उन्हें पंखे तथा कूलर भी राहत नहीं दे पा रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक लू चल रही है। किसी वक्त भी राहत की लोगों को नहीं मिल रही है। शाम चार बजे भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई। शाम छह बजे तक लू के थपेड़े लोगों को परेशान कर रही है। दोपहर की तेज धूप त्वचा को इतनी चुभ रही है कि लोगों का बाहर निकला मुश्किल हो गया है। मौसम विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि मंगलवार को अधिकतम तापमान रहा। एक दो दिन में तामपान इसी तरह बना रहेगा। अगले सप्ताह ये 44 डिग्री पहुंच जाएगा।
स्कूल में पेयजल के लिए तरसती हैं छात्राएं
कन्या विद्यालय मानेसर में अध्यापक व छात्राएं पीने के पानी के लिए तरस रही हैं। काफी दिनों से स्कूल में पेयजल संकट है। छात्राएं घर से पानी की बोतल भरकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जबकि गर्मी के दिनों में एक बोतल पानी कम पड़ जाता है। इससे दोपहर बाद छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पानी के अभाव में उनका गला सूखने लगता है। प्यास की वजह से छात्राएं बैचेन हो जाती है और छुट्टी का इंतजार करती हैं। वहीं पेयजल संकट की जानकारी उच्च अधिकारियों को होने के बावजूद भी इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
अध्यापकों को इस बारे में बताने के बाद भी स्कूल में पेयजल संकट खत्म नहीं हुआ है। सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही हैं, जबकि स्कूलों में लड़कियों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा हैं।
मालूम हो कि दिल्ली-जयपुर हाईवे नंबर-8 की गांव मानेसर में सर्विस लाइन बनाने का काम चल रहा है। इसके दायरे में कन्या स्कूल का शौचालय व पेयजल टंकी आ जाने से एनएचएआई ने उसे तोड़कर जगह खाली करा दी है, जबकि इससे पहले इनकी कोई व्यवस्था नहीं गई है। पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण अब नई बिछाई जा रही है। ऐसे से कन्या विद्यालय में पेयजल संकट से दो-चार होना पड़ रहा है।
मानेसर क्षेत्र में मारुति कंपनी ने सरकारी स्कूलों में पानी व अन्य उपकरणों की सुविधा मुहैया कराई हुई है, लेकिन पिछले कई दिनों से इस समस्या की ओर भी कंपनी ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इससे कन्याएं तपती दोपहरी में पेयजल संकट झेलने को मजबूर हैं।
इस बारे में सरपंच पूजी देवी ने बताया कि कुछ दिनों पहले स्कूल में पानी की मोटर खराब होने की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई है, लेकिन प्रतिदिन टैंकर मंगाकर पेयजल मुहैया कराया जा रहा है। इस काम में मारुति कंपनी भी सहयोग कर रही है। नई पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। एक-दो दिन में ही कन्या स्कूल में पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
भीषण गर्मी के साथ उद्योग विहार में गहराया जल संकट
इंडस्ट्रियल हब उद्योग विहार में भीषण गर्मी के साथ जल संकट भी गहरा गया है। यहां की औद्योगिक इकाईयों में वाटर टैंकरों की मांग बढ़ गई है। उद्यमियों की शिकायत है कि एचएसआईआईडीसी से बार-बार शिकायत के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। अभी तो अप्रैल मई-जून में क्या होगा यह चिंता अभी से सताने लगी है। टैकर वाले भी उद्योगों की मजबूरी का फायदा उठाने लगे हैं। टैंकरों का भाव वह बढ़ाते जा रहे हैं।
उद्योग विहार में छोटी-बड़ी तीन हजार से अधिक औद्योगिक इकाईयां हैं। जो पानी की काफी कम उपलब्धता से परेशान हैं। इन्हें तीन लाख से अधिक लोगों की प्यास बुझाने के लिए टैंकर से जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गुडग़ांव उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष परवीन यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में जल संकट काफी मुसीबत बना हुआ है।
मगर एचएसआईआईडीसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो यहां से उद्योगों का पलायन होने लगेगा। प्रदेश की नई सरकार ने अभी तक उद्योगों को सिर्फ सपने दिखाए हैं। धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि हैपनिंग हरियाणा के दौरान गुडग़ांव के सांसद ने भी पानी का मुद्दा निवेशकों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया था।
उद्योगों को हर माह पानी के लिए काफी धन खर्च पडना पड़ रहा है। इससे उनका बजट काफी बिगड़ रहा है। उद्योग विहार फेज-5 के अनिल शर्मा ने बताया कि वह जिस यूनिट में काम करते हैं वहां रोजाना तीन से चार टैंकर पानी मंगाना पड़ता है। चार से आठ हजार रुपये टैंकर रोजाना खरीदना काफी दुखी कर रहा है।
पूरे गर्मी के सीजन में अगर पानी के खर्च का अनुमान लगाकर ही होश उड़ रहे हैं। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि उद्योगों के हक का पानी कोई और ले रहा है।
जिस पाइप लाइन से यहां जलापूर्ति होती है उसी लाइन से माजा फैक्टरी को भी पानी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग विहार के फेज-1 से लेकर 5 तक में पानी की भारी किल्लत गर्मी के साथ ही बढ़ती जा रही है। सप्लाई के पानी से 10 फीसदी भी जरूरत पूरी नहीं हो रही है।