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दम तोड़ रहा परिवार नियोजन, नसबंदी में पुरूषों से आगे महिलाएं

Sun, 21 Feb 2016 05:48 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 21 Feb 2016 05:48 PM IST
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Succumbed to family planning, sterilization of women ahead of men.

महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा आज भी कमजोर समझा जाता है, लेकिन परिवार नियोजन के मामले में मेवात में महिलाएं  पुरुषों से कहीं आगे हैं।

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स्वास्थ्य विभाग पुरुषों की नसबंदी के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार कर रहा है, बावजूद इसके पुरूष नसबंदी कराने से कतराते हैं। अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2012-13 में 48, 2013-14 में 624 व 2014-15 में 466 लोगों की नसबंदी की गई है। इस प्रकार जिले में कुल 1138 लोगों ने नसबंदी कराई।
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इनमें से 1134 महिलाओं और मात्र चार पुरूषों ने नसबंदी कराकर परिवार नियोजन का लाभ उठाया। स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन योजना के तहत पुरुषों को पुरस्कृत करने की भी योजना चलाई हुई है, लेकिन इसके पश्चात भी पुरुष महिलाओं से काफी पीछे है।
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मेवात क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के लोग भारी संख्या में रहते हैं। इनकी धारणा है कि नसबंदी करवाने के पश्चात व्यक्ति को कमजोरी आती है। वहीं यह योजना मजहब के खिलाफ है और नसबंदी का शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

जो परिवार इसका फायदा उठाने के इच्छुक होते हैं, वह पुरुषों के बजाय महिलाओं को नसबंदी के लिए आगे कर देते हैं। बता दें कि इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीएचसी स्तर पर कैंप लगाकर नसबंदी की जाती थी, लेकिन अब लंबे समय से कैंप बंद हैं।

इसकी वजह से इसकी संख्या का स्तर गिर रहा है। वर्ष 2008-9 में जहां यह संख्या 1158 थी, वहीं वर्ष 2012-13 में 48 व 2013-14 में 624 व 2014-15 तक 466 सिमट कर रह गई है। इस योजना के तहत प्रसव के एक सप्ताह के अंदर नसबंदी कराने पर विभाग की ओर से 22 सौ रुपये व जनरल नसबंदी कराने पर 1100 रुपये दिए जाते हैं।


परिवार नियोजन के लिए मोटीवेट करने पर भी विभाग प्रोत्साहन राशि देता है। इसके बाद भी मेवात में परिवार नियोजन दम तोड़ता नजर आ रहा है।

सिविल सर्जन मेवात डॉ. बी के राजौरा ने बताया कि बेहतर सुविधा को देखते हुए मांडीखेड़ा अस्पताल में ही नसबंदी की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नसबंदी के कुछ मामले बिगड़ने की वजह से स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी व सीएचसी स्तर पर नसबंदी करने से मना किया हुआ है।

सर्जन नहीं होने के कारण भी परिवार नियोजन का आंकड़ा कुछ कम था। अब जिले में पर्याप्त सर्जन आ गए हैं। इस योजना को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। महिलाओं और पुरुषों के अंतर को भी पाटने का प्रयास विभाग की ओर से किया जा रहा है।

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