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पहली बार: 18 घंटे चली इस बच्चे की सर्जरी

Wed, 01 Apr 2015 07:47 PM IST
Updated Wed, 01 Apr 2015 07:47 PM IST
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Successful open heart surgery of infant in delhi

देश में पहली बार 18 घंटे के किसी नवजात की सफल ओपन हार्ट सर्जरी करने का दावा दिल्ली के डॉक्टरों ने किया है। सर्जरी के बाद संक्रमण व किसी अन्य आपात स्थिति में हृदय को दोबारा न खोलना पड़े, इसलिए चिकित्सकों ने सर्जरी के बाद तीन दिनों तक हृदय को खुला ही रखा।

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उसको बिना वेंटिलेटर एक पल भी रखने पर जान को खतरा था लेकिन भगवान भरोसे सिर्फ ऑक्सीजन के सहारे उसे मथुरा से दिल्ली लाया गया।

बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। लेकिन बच्चे को नियमित जांच के लिए आना होगा। बच्चा (मयंक) अब साढ़े तीन माह का हो चुका है।

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जन्म से थी ‌दिल की बीमारी

Successful open heart surgery of infant in delhi
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के पीडियाट्रिक एंड कॉंजेनाइटल हार्ट डिजीज के निदेशक डॉ. केएस अय्यर ने बताया कि मथुरा निवासी मयंक को जन्म से ऑब्सट्रेक्टिड क्रिटिकल टोटल एनॉमोलस पल्मोनरी विनॉउस कनेक्शन (टीएपीवीसी) हृदय की बीमारी थी।

इसमें रक्त ने फेफड़ों से हृदय और शरीर तक जाने के लिए सामान्य रास्ता नहीं लिया। फेफड़ों से निकलने वाली नसें असामान्य स्थिति में हृदय से जुड़ी थीं, इससे ऑक्सीजनयुक्त रक्त गलत चैंबर में घुस गया था और फेफड़ों में भरने लगा। परिणामस्वरूप शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी गिर गया और शरीर नीला पड़ गया था।

जन्म के 12 घंटे के अंदर नवजात को अस्पताल ले आया गया था इसके बाद बच्चे की स्थिति को स्टेबलाइज करके ओपन हार्ट सर्जरी की गई। नवजात की उम्र मात्र 18 घंटे की थी इसलिए सर्जरी के बाद भी दिल को तीन दिन तक खुला रखा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

7 ‌दिनों तक मयंक आईसीयू में रहा

Successful open heart surgery of infant in delhi

इसके बाद फेफड़े की नसों को फिर से बाएं एट्रियम से जोड़ दिया गया और धमनी के सैप्टल दोष को बंद कर दिया गया। सात दिनों तक नवजात को आईसीयू में रखा गया और 27 दिनों के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई।

डॉ. अय्यर ने बताया कि गर्भवती को 16 सप्ताह में फीटल ईको जांच करानी चाहिए। इस तरह की हृदय संबंधी बीमारी का पता इस जांच में आसानी से लग जाता है। बीमारी का पता लगने के बाद परिजन स्वयं फैसला ले सकते हैं कि बच्चे को जन्म देना है या नहीं।

भगवान पर भरोसा कर दिल्ली लाया
मयंक के पिता कृष्णा नगर, मथुरा निवासी गोपाल अग्रवाल ने बताया कि 12 दिसंबर की रात 11 बजे एक नर्सिंग होम में बच्चे का जन्म हुआ, जन्म के 10 मिनट के बाद बताया गया कि उसकी हालत खराब है और उसे वेंटिलेटर की जरूरत है। इसके बाद दूसरे अस्पताल ले जाया गया, वहां भी कहा गया कि बच्चे को यहां संभालना मुश्किल है।

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हजार में आठ ऐसे बच्चे होते हैं पैदा

Successful open heart surgery of infant in delhi

डॉक्टरों ने दिल्ली ले जाने की सलाह दी लेकिन यह भी कहा कि वेंटिलेटर से हटाया तो जान जा सकती है। गोपाल ने कहा कि भगवान भरोसे ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे नवजात को दिल्ली लाया गया।

ऑक्सीजन का स्तर 40/100 और फिर 10/100 आ गया था। वे 13 दिसंबर को दोपहर 11 बजे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल पहुंच गए जिसके बाद इलाज शुरू हो गया।

चिकित्सकों ने बताया कि भारत में 1000 में से छह से आठ बच्चे ऐसे जन्म लेते हैं जोकि कंजेनाइटल हार्ट डिजीज से पीड़ित होते हैं। इसमें 10 से 15 फीसदी मरीजों की मौत इलाज नहीं मिलने से अथवा इलाज में देरी से हो जाती है।

हालांकि इस तरह के ब्ल्यू बेबी के मामले बहुत कम आते हैं। डॉ. अय्यर पिछले 14 वर्ष में ऐसी 270 सर्जरी कर चुके हैं लेकिन 18 घंटे के नवजात की सर्जरी का यह पहला मामला सामने आया है।

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