बच्चों में हिंसात्मक प्रवृत्ति बढ़ने का कारण है पढ़ाई का बोझ, माता-पिता कभी ना करें ये काम
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हरियाणा के यमुनानगर में स्वामी विवेकानंद स्कूल की प्राचार्या रितू छाबड़ा की हत्या उन्हीं के स्कूल में 12वीं में पढ़ने वाले छात्र शिवांश गुंबर ने गोली मारकर कर दी।
इससे पहले गुरुग्राम के एक स्कूल में एक छात्र द्वारा दूसरे छात्र की हत्या और लखनऊ के एक स्कूल में क्लास 6 की छात्रा द्वारा पहली क्लास के छात्र पर जानलेवा हमले की घटनाएं भी अभी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
छात्रों में बढ़ते इस आक्रामक व्यवहार की कई वजहें हो सकती हैं। नोएडा के शिक्षकों की मानें तो कहीं न कहीं इसकी वजह छात्रों पर बढ़ता प्रेशर भी है।
ज्यादा प्रेशर से मासूमितय खो देते हैं बच्चे
आज के दौर में छात्रों पर दबाव बहुत अधिक बढ़ चुका है। पहले छात्र फ्री माइंड से पढ़ा करते थे। कई छुट्टियां मिलती थी और छुट्टियों का मतलब सिर्फ छुट्टी होता था। आज छुट्टी में भी छात्र के पास बहुत सारा काम होता है। अभिभावक, शिक्षक सभी का दबाव रहता है कि बच्चा अधिक अधिक स्मार्ट बने। इस होड़ की वजह से कई बार बच्चे अपनी मासूमियत खो देते हैं उनमें सही गलत को समझने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती है। यही कारण है कि आज बच्चे छुट्टी करवाने के लिये मर्डर जैसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं। - प्रीती राजवंशी आईटी विभागाध्यक्ष, आईएमएस कॉलेज
सबको समझनी होंगी नैतिक जिम्मेदारियां
बच्चों में बढ़ते प्रेशर और मां-बाप की उपेक्षा भी परिस्थितियों को नकारात्मक दिशा देती है। यदि किसी छात्र के घर में हथियार है, तो उसे बच्चों की पहुंच से दूर होना चाहिए। साथ ही अभिभावकों का दायित्व है कि बच्चों को उसके नुकसान और सही गलत के बारे में जानकारी दें। कई बार यदि शिक्षक छात्रों को डांटते हैं, तो अभिभावक उनके लिए लड़ने आ जाते हैं, बिना यह सोचे कि कहीं हमारा बच्चा गलत रास्ते पर तो नहीं जा रहा है। शिक्षकों अभिभावकों सभी को अपनी नैतिक जिम्मेदारियां समझनी चाहिए।- मंजू शर्मा, प्राचार्या, राजकीय डिग्री कॉलेज
सबको मिलकर उठाने होंगे कदम
शिक्षक का दर्जा बेहद ऊंचा है। उसे उसके हिस्से का सम्मान प्राप्त होना ही चाहिए। यदि छात्र को शिक्षक डांट भी रहे हैं तो उनकी भलाई के लिए ही डांट रहे हैं। यह बात सभी को समझनी चाहिए । वर्तमान समय में छात्रों पर प्रेशर बढ़ रहा है इसलिए वह सही गलत का अंतर समझने में नाकाम हो रहे हैं, इस स्थिति को बदलने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों सभी को कदम उठाने होंगे।- अरुण यादव, छात्रसंघ अध्यक्ष
जरूरी है मेंटल हेल्थ चेकअप : मनोचिकित्सक
अपरिपक्वता की वजह से कई बार स्थितियां बेहद गंभीर हो जाती हैं। बच्चे हों या बड़े अप्रत्याशित घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते वक्त कई बार लोग संयम खो देते हैं। बढ़ती आक्रमकता का कारण सामाजिक माहौल, इंटरनेट एडिक्शन, बढ़ता प्रेशर कई हैं।
इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि अभिभावक और शिक्षक संयम से काम लें। छात्रों को समझने और उन्हें सही गलत समझाने का प्रयास करें। अपने अहम को खुद पर हावी होने से रोके, और यदि आपको लगता है कि आप अपने अहम को कंट्रोल करने में असमर्थ हैं, तो मनोचिकित्सकों की सलाह अवश्य लें।