दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दिल्ली हाईकोर्ट को लिखा पत्र, ओपन बुक एग्जामिनेशन पर रोक लगाने की मांग
- केंद्रशासित क्षेत्र कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं न होने से पढ़ाई प्रभावित होने और ओपन बुक परीक्षा में शामिल होने पर छात्रों ने जताया विरोध
- 170 प्रोफेसरों ने भी विश्वविद्यालय के फैसले से जताई असहमति, अन्य विकल्प अपनाने की बात कही
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने हाईकोर्ट से अपील की है कि वो विश्वविद्यालय में ओपन बुक परीक्षा पद्धति से परीक्षाएं कराने पर रोक लगाने का निर्देश जारी करें।
अनेक छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल को पत्र लिखकर कहा है कि कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं हैं। कई जगहों पर इंटरनेट पूरी तरह नहीं है, तो कुछ इलाकों में टू-जी स्पी़ड से इंटरनेट सेवाएं मिल रही हैं। ऐसे में इन इलाकों में रहने वाले छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय की ओपन बुक परीक्षा (OBE) नहीं दे सकते।
दिल्ली हाईकोर्ट से अपील करने वाले छात्रों में से एक अलीशान जाफरी ने अमर उजाला से कहा कि 17 मई को उन लोगों ने पत्र लिखकर न्यायमूर्ति से इस मामले में दखल देने की मांग की थी।
इसके बाद 19 मई को वे मुख्य न्यायाधीश के घर जाकर व्यक्तिगत तौर पर मिलकर ओपन बुक परीक्षा रुकवाने की अपील की थी। उन्हें ऑनलाइन जनहित याचिका दायर करने के लिए कहा गया था।
अलीशान ने बताया कि विश्वविद्यालय के 43 फीसदी छात्रों ने कक्षाएं नहीं ली हैं। इंटरनेट सेवाओं की गति के कारण छात्र पढ़ाई नहीं कर पाए हैं।
दिव्यांग छात्रों को विश्वविद्यालय से सहयोगी दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन ओपन बुक एग्जामिनेशन में दिव्यांग छात्रों के लिए किसी प्रावधान की बात नहीं की गई है।
इससे अनेक साथियों के परीक्षा में ही शामिल न हो सकने का खतरा पैदा हो गया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपील की है कि ओपन बुक एग्जामिनेशन का फैसला टाला जाए और एक उचित माध्यम का इस्तेमाल कर परीक्षाएं आयोजित कराई जाएं।
170 शिक्षकों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर ओपन बुक परीक्षाएं आयोजित न कराने के लिए कहा है।
इसके पूर्व, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोरोना संक्रमण से उपजी परिस्थिति में सामान्य परीक्षाएं आयोजित न हो पाने की स्थिति में एक जुलाई से ओपन बुक परीक्षाएं आयोजित कराने का फैसला लिया था, जिससे स्नातक तृतीय वर्ष और परास्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं आयोजित की जा सकें।
दयाल सिंह कॉलेज में रसायन शास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर एके भागी ने अमर उजाला से कहा कि छात्रों को जिस माध्यम से पढ़ाया नहीं गया है, उन्हें परीक्षा देने के लिए जिस माध्यम से तैयार ही नहीं किया गया है, उस माध्यम से परीक्षा लेने से छात्रों का मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।
इससे किसी साधन संपन्न छात्र को ज्यादा अंक मिलने और किसी प्रतिभावान छात्र के संसाधनविहीन होने पर कम अंक मिलने की पूरी संभावना बनी रहेगी। यह परिणाम छात्र के पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए छात्रों को विश्वास में लिए बिना परीक्षा आयोजित कराना उचित फैसला नहीं होगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता आशुतोष सिंह ने कहा कि उनका संगठन भी ओपन बुक एग्जामिनेशन का विरोध कर रहा है।
हजारों छात्र होली के त्योहार के पहले ही अपने घरों को जा चुके थे और उनके पास अपनी पूरी किताबें भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनके लिए परीक्षा की तैयारी कर पाना संभव नहीं हुआ है।
इंटरनेट सेवाओं की धीमी गति के कारण हजारों छात्र ऑनलाइन कक्षाओं का भी पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाए हैं। ऐसे में अचानक ओपन बुक परीक्षा करवाना उचित नहीं है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को सलाह दी है कि इसके लिए छात्रों से बातचीत कर उचित रास्ता तलाशा जाए।