अमर उजाला पड़ताल: ज्ञान बांटने वाले कर रहे जीवन से खिलवाड़, आंखें मूंदे बैठा है सरकारी तंत्र
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भविष्य बनाने के नाम पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। संकरे रास्ते, जर्जर बिल्डिंग, हवा तक जहां प्रवेश नहीं कर सकती, उन इमारतों में सैकड़ों कोचिंग संस्था चलाई जा रही हैं। अदालत की चेतवानी का भी इन पर कोई असर नहीं है। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो स्थिति बेहद खतरनाक सामने आई। कागजी घोड़े दौड़ाने वाला सरकारी तंत्र अभी भी धरातल पर नहीं उतरा तो सूरत जैसे हादसे को नहीं रोका जा सकता। भूकंप के हल्के झटके या प्रवेश द्वार पर बिजली मीटरों में शार्ट सर्किट हो जाए तो बच्चों का कोचिंग क्लास से सकुशल निकलना मुश्किल है।
टाला नहीं जा सकता हादसा
मुखर्जी नगर स्थित बत्रा कांप्लेक्स में कई बिल्डिंग हैं, जहां बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। कई कोचिंग सेंटर छोटे-छोटे कमरे में चल रहे हैं तो, कई बेसमेंट में चल रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में बच्चे भविष्य को संवारने के लिए पहुंचते है। कोचिंग सेंटर वाले ज्ञान बांटने के नाम पर फीस तो वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर हाथ खड़े कर देते हैं।
बत्रा कैंपस स्थित जैना हाउस, अंसल बिल्डिंग, मनूश्री बिल्डिंग की जब पड़ताल की गई तो प्रवेश द्वार पर ही एक साथ दर्जनों बिजली मीटर दिख, जिनमें तारें उलझी हुई थी। यदि शार्ट शर्किट हो जाए तो एक मात्र निकलने के यहीं रास्ते से बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाए। ऐसी स्थिति में बिल्डिंग से कूदने के अलावा जान बचाने का कोई उपाय नहीं है। बिल्डिंग से कूदने पर जान बच जाए, इसकी भी गारंटी नहीं है। क्योंकि, हर जगह मौत रूपी बिजली तार झूल रही हैं।
दमघोंटू है प्रवेश द्वार
कोचिंग सेंटर में प्रवेश करना बेहद ही दमघोटू है। अंदर कोचिंग सेंटर में भले ही एसी की व्यवस्था है, लेकिन सीढ़ियों से चढ़ना मुश्किल है। इसी तरह बेसमेंट का हाल है। हवा बाहर निकलने के लिए पंखे तो लगे हैं, परंतु ताजी हवा की कोई व्यवस्था नहीं है। सीढ़ियों की स्थिति ऐसी है कि यदि कोई हादसा हो जाए और भगदड़ मच जाए तो कई बच्चे बेमौत मारे जाएं।
फायर सेफ्टी भी अधूरी
कोचिंग सेंटर में फायर की तरफ व्यवस्था भी है, लेकिन इतनी जर्जर स्थिति है कि उस मशीन का संचालन ही मुश्किल है। आग बुझाने वाले उपकरण में लगी पानी की पाइप लाइन भी टूटी हुई पाई गई।
कोचिंग सेंटर में पानी का जमाव
बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतर नहीं दिखाई पड़ा। प्रवेश द्वार तो दमघोटू है ही, साथ ही बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी जमा हो जाता है। इस पानी को पंप से निकालने के बाद ही कक्षाएं शुरू होती है। इससे करंट लगने का खतरा भी बना रहता है।
प्रचार बोर्ड से ढक गई हैं खिड़कियां
कोचिंग सेंटर जहां चल रहा है उस बिल्डिंग का बाहरी हिस्सा पूरी तरह से प्रचार बोर्ड से ढका हुआ मिला। सभी खिड़कियां प्रचार बोर्ड से छिप गई है। इसी तरह पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने से प्रवेश द्वार पर वाहनों की पार्किंग होती है। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाता है तो भगदड़ में कई लोगों की जान भी जा सकती है।
छात्रों ने क्या कहा ?
सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वाकई यहां जान का खतरा है, लेकिन मजबूरन उन्हें इस तरह के कोचिंग सेंटरों का रुख करना पड़ता है- विजय जायसवाल
बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगाने, प्रचार करने में तो कोचिंग वाले पैसा खर्च करते है, लेकिन सुरक्षित माहौल में कैसे शिक्षा दी जाए इसका किसी को ख्याल नहीं है- कृष्ण कुमार जायसवाल
कोचिंग इंस्टीट्यूट संचालक का ध्यान सिर्फ बच्चों की संख्या पर रहता है। सुरक्षा उनके लिए दोयम दर्जे वाला है। सूरत हादसे से सरकार व स्थानीय निकाय को सबक लेना चाहिए- मोहित चौधरी
सुरक्षा अहम मुद्दा है। यदि कोई हादसा हो जाए तो फिर कोचिंग सेंटर से सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल है। इतना तो ध्यान सरकार व स्थानीय निकाय को देना ही चाहिए- राकेश
क्या कहना है बिजली कंपनी का ?
कोचिंग सेंटर को लेकर अदालत ने बिजली आपूति कंपनी टाटा पावर लिमिटेड की खिंचाई की है। कोचिंग सेंटर में बिजली काटने पर बिजली कंपनी का कहना है कि वे एक्शन प्लान तैयार कर रहे हैं। डीडीए, एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, बिल्डिंग अथोरिटी विभाग समेत अन्य निकायों के साथ इस तरह की बिल्डिंग का जायजा लिया जाएगा।
प्रवेश द्वार और संकरे इलाके में बिजली मीटर लगाने के संबंध में बिजली कंपनी का कहना है कि बिजली आपूर्ति करना कंपनियों की मजबूरी है। स्थानीय निकाय की जहां स्वीकृति होती है, वहीं बिजली के मीटर लगाए जाते हैं।
दिल्ली में महज 33 कोचिंग सेंटर तोड़ रहे फायर सेफ्टी के नियम
हैरत की बात है कि दिल्ली फायर सर्विस के रिकॉर्ड में महज 33 कोचिंग सेंटर ही ऐसे हैं जहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं। वह बात और है कि यहां सैकड़ों कोचिंग सेंटरों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। सूरत हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में ऐसे सभी कोचिंग सेंटर की जांच करने के निर्देश दिए थे, जहां फायर सेफ्टी नियमों को ताक पर रखकर कोचिंग दी जा रही है।
दमकल विभाग को सिर्फ 33 कोचिंग सेंटर ही नियम तोड़ते मिले। हालांकि, इसके पीछे दमकल विभाग के अधिकारी नियमों की दुहाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि सभी कोचिंग सेंटर दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट से बाहर हैं। जो कोचिंग सेंटर कम ऊंचाई वाली इमारतों में चल रहे हैं, उन पर वह चाहकर भी कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।
दिल्ली फायर सर्विस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कोचिंग सेंटर दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट में मौजूद नो-श्रेणीसे बाहर है। इसलिए उन्हें फायर एनओसी दमकल विभाग नहीं देता है। दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट में मौजूद एजुकेशन प्लान में स्कूल, कॉलेज और डे-केयर सेंटर आते हैं। कोचिंग सेंटर को इस नियम से बाहर रखा गया है। या तो कोचिंग सेंटरों को भी एजुकेशन प्लान में शामिल किया जाए या इनकी नियमित जांच के लिए कोई अथॉरिटी होना चाहिए। दिल्ली में ज्यादातर कोचिंग सेंटर या तो भूतल पर हैं या पहली और दूसरी मंजिल चल रहे हैं।
इन इमारतों में कोचिंग सेंटर के अलावा लोग रह भी रहे हैं। ऐसे में इन कोचिंग सेंटर पर दमकल विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है, जहां 33 कोचिंग सेंटर का मामला है। वहां जांच के दौरान ऐसी इमारतों की पहचान की गई जो 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली थीं। इन सभी कोचिंग सेंटर संचालकों को नोटिस दिया गया।
कोचिंग सेंटर दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट से बाहर है। इसी वजह से इन पर दमकल विभाग के नियम लागू नहीं होते हैं। नियम तोड़ने वाली 33 बिल्डिंग की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं- विपिन कैंटल, निदेशक, दिल्ली फायर सर्विस