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जेएनयू स्कूल जीबीएम में आपस में भिड़े छात्र: वामपंथी और एबीवीपी के छात्रों के बीच मारपीट, जानें क्या है मामला

Wed, 15 Oct 2025 10:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 15 Oct 2025 10:38 PM IST
सार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव से पहले स्कूल ऑफ सोशल साइंस में वामपंथी गुट और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों के बीच बुधवार शाम को आपस में झड़प हो गई।

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Students clashed at JNU GBM School Left wing and ABVP students clashed find out what the matter in Delhi
जेएनयू स्कूल जीबीएम में आपस में भिड़े छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव से पहले स्कूल ऑफ सोशल साइंस में वामपंथी गुट और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों के बीच बुधवार शाम को आपस में झड़प हो गई। स्कूल में जनरल बॉडी मीटिंग(जीबीएम) का आयोजन चल रहा था। इसमें एक काउंसलर पर यूपी और बिहार के छात्रों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। टिप्पणी पर माफी न मांगने पर हालात मारपीट तक पहुंच गए। इसमें कुछ छात्रों के चोटिल होने की बात भी सामने आई है।

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एबीवीपी से जेएनयू छात्र संघ में संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने आरोप लगाते हुए बताया कि स्कूल जीबीएम के दौरान वामपंथी गुट से जुड़े एक काउंसलर ने अत्यंत भेदभावपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि एबीवीपी से जुड़े उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्र जेएनयू में आने के योग्य नहीं है। इन्हें ऑडिटोरियम और कैंपस से बाहर कर देना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद जीबीएम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। काउंसलर की इस टिप्पणी पर उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया। मगर, काउंसलर ने माफी से इनकार कर दिया। 
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छात्रा के चेहरे पर मारा थप्पड़ 
इस बीच नारेबाजी शुरू हो गई। वामपंथी गुट के एक छात्र ने एबीवीपी से जुड़ी छात्रा के चेहरे पर थप्पड़ मार दिया। उसके बाद हालत बिगड़ते चले गए और छात्रों के बीच मारपीट की घटना हो गई। इस हिंसा में कई छात्र घायल हुए, जिनमें छात्राएं भी शामिल है। हैरानी वाली बात यह है कि वामपंथी गुट से आने वाले और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इस पूरी हिंसा का नेतृत्व किया।
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जेएनयू की लोकतांत्रिक परंपरा पर हमला 
वैभव मीणा ने कहा कि  वामपंथी गुटों द्वारा छात्राओं पर हमला अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है। एबीवीपी-जेएनयू ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करता है। यह घटना जेएनयू की लोकतांत्रिक और बौद्धिक परंपराओं पर सीधा हमला है। जब तक काउंसलर माफी नहीं मांगेगा। स्कूल जीबीएम आयोजित नहीं होने देंगे। यह घटना जेएनयू की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन असहमति के जवाब में हिंसा और क्षेत्रीय घृणा फैलाना लोकतंत्र के विरुद्ध है। उत्तर प्रदेश, बिहार या किसी भी राज्य से आने वाले छात्र समान गरिमा रखते हैं। किसी को यह अधिकार नहीं कि वह क्षेत्र, विचारधारा या संगठन के आधार पर किसी का अपमान करे या हमला करे।
 
वीडियो में मारपीट करते दिख रहे छात्र 
बता दें कि इस घटना के संबंध में कई सारे वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें एक छात्र के सिर से खून निकलता दिखाई दे रहा है। एक वीडियों में छात्र आपस में एक-दूसरे के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे है। साथ की एक छात्र के हाथ में पतला सा डंडा भी दिखाई दे रहा है। हालांकि वह उसे नीचे कर लेता है। 

एबीवीपी के आरोप को बताया बेबुनियाद
वामपंथी गुट से जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष मनीषा ने कहा कि एबीवीपी की ओर से जो भी आरोप लगाए गए है, वह पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है। स्कूल जीबीएम में हिंसा एबीवीपी ने की है। इस मारपीट में दो-तीन छात्र घायल और सिर फट गया है। सफदरजंग अस्पताल में उनका उपचार जारी है। एबीवीपी द्वारा की हिंसा के वीडियो वायरल हो रहे है। स्कूल जीबीएम के मंच को हाइजैक कर लिया था। स्कूल जीबीएम का आयोजन नहीं होने दिया गया। 

काउंसलर ने नहीं की कोई आपत्तिजनक टिप्पणी 
जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा मौके पर मौजूद थे। मंच से बिहार और यूपी के छात्र के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गई है। काउंसलर के कपड़े फाड़ दिए गए। एबीवीपी ने हर स्कूल जीबीएम के दौरान हंगामा किया है। हार के डर से वह चुनाव आयोजित होने देना नहीं चाहते है। इस पूरी घटना की शिकायत प्रशासन और पुलिस को करेंगे। हिंसा करना एबीवीपी का काम है।     

जेएनयू प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंस में हुई मारपीट की घटना को प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि पूरा मामला हमारे संज्ञान में है। इस मसले पर सुरक्षाकर्मियों से रिपोर्ट मांगी गई है। फिर चीफ प्रॉक्टर की अनुशंसा पर उचित कार्रवाई की जाएगी। 


बड़े स्कूलों में जीबीएम का होना बाकी
वहीं अभी तक 11-12 स्कूलों में 7-8 स्कूलों में जीबीएम आयोजित हो चुकी है। कुछ बड़े स्कूलों में जीबीएम का होना बाकी रह गया है। जीबीएम के जरिये चुनाव समिति सदस्यों का चुनाव होता है। फिर सभी सदस्य मिलकर सर्वसम्मति से चुनाव समिति संयोजक का चयन करते है। उसके बाद चुनाव को लेकर पूरा कार्यक्रम जारी होता है। साथ ही काउंसलर अपनी रिपोर्ट भी रखते है। चुनाव को लेकर जेएनयू प्रशासन पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है। पीएचडी का सत्र शुरू होने के छह से आठ हफ्तों के अंदर चुनाव के आयोजन का प्रावधान है। जेएनयू में पीएचडी का सत्र 12 सितंबर को शुरू हुआ था।
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