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मोदी और केजरीवाल के बीच टूटा दिल्ली वालों का सपना

Fri, 20 Mar 2015 12:45 PM IST
Updated Fri, 20 Mar 2015 12:45 PM IST
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Stuck between PM and CM dream of a World Class City of delhi

जब दिल्ली जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री केजरीवाल हंसते हुए मिले तो उम्मीद बंधी की अब दोनों सरकारें मिलकर काम करेंगीं लेकिन सच ये नहीं है। राजनीतिक तस्वीरों में झलक रही हंसी अक्सर झूठी होती है, और हर बाद हार आवाम के हिस्से में ही आती है।

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राजनीतिक वादों और राजनीतिक दावों के फेर में फिलहाल दिल्ली को सपनों का शहर का बनाने का सपना छिटक गया है। इसके लिए 41000 करोड़ का प्रोजेक्ट बना था, लेकिन फिलहाल ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
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मोदी सरकार जिस सपनों की दिल्ली की तस्वीर चुनाव से पहले लोगों को दिखा रही थी, फिलहाल उस तस्वीर का चेहरा स्याह हो गया है, और उन वादों पर इस वक्त अमल नहीं किया जाना है।
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दो अलग नजरिए में फंस गया या पेंच

Stuck between PM and CM dream of a World Class City of delhi

मोदी सरकार चाहती थी कि दिल्ली को वो वर्ल्ड क्लास सिटी का दर्जा दे सकें, वहीं केजरीवाल सरकार का पहला प्लान दिल्ली को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना है। पीएम और सीएम की इस राजनीतिक लड़ाई में दिल्ली की चमकने वाली तस्वीरे से चमकने वाले रंग गायब हो गए हैं।

दोनों ही नेता अलग-अलग तरह से सोचते हैं और दोनों की प्लानिंग में फर्क है। दोनो की योजनाएं भी अलग है। अगर इन नेताओं के नजरिए से दिल्ली को देखें तो अलग तरह की दिल्ली नजर आती है।

दिल्ली के लिए मोदी ने अक्टूबर-नवंबर में 2014 में 6 बड़ी मीटिंग की। 19 मंत्रालयकों को इसमें शामिल किया गया था। दिल्ली के लिए मोदी का 9 सूत्रीय एजेंडा था।

41000 करोड़ की योजना और दिए सिर्फ 300 करोड़

Stuck between PM and CM dream of a World Class City of delhi

रेलवे, बस कनेक्टिविटी, साईकिल ट्रैक, नई सड़कें, फ्लाईओवर, बाईपास, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम समेत कई मामलों को मिलाकर वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के लिए 41000 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया था। मोदी ने इसके लिए चुनाव से पहले तैयारियों शुरू कर दी थीं, लेकिन चुनाव नतीजों उल्टे आए और मामले एक साइड हो गया।

केजरीवाल सरकार बोली की दिल्ली के लिए मोदी सरकार ने प्लानिंग तो 41 हजार करोड़ की कर दी और योजनाओं के नाम पर जारी किए 300 करोड़ ऐसे में कैसे वर्ल्ड क्लास सिटी का सपना पूरा होगा।

वहीं केजरीवाल सरकार अपनी बोतोंमें दब भरते हुए कहती है कि उन्हें सपनों की नहीं हकीकत में दिल्ली के लिए मजबूत सुविधाएं मुहैया कराने की फिक्र है। केजरीवाल सरकार ने दावा किया है कि आम-आदमी को अच्छे दिनों का एहसास कराना चाहती है, और अभी सपनों की दिल्ली दूर है।

क्या है मोदी सरकार की दिल्ली के लिए प्लानिंग

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तेजी से दौड़ती दिल्ली मोदी सरकार ने दिल्ली को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के लिए फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड बनाने की योजना खास दिल्ली के लिए बनाई थी।

इसमें महरौली बदरपुर रोड को नोएडा तक ले जाने की योजना शामिल है। दिल्ली के लिए ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा महिपालपुर बाईपास से एनएच 8 तक 630 करोड़ रुपये खर्च करके बेहतर रोड बनाने की योजना भी मोदी सरकार के प्लान में शामिल है।

ये है केजरीवाल सरकार की प्लानिंग

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केजरीवाल सरकार के काम करने का तरीका मोदी सरकार की कार्यप्रणाली से जुदा नजर आता है। केजरीवाल ने दावा किया है कि वो दिल्ली को बुनियादी मुद्दों पर पहले मजबूती देंगे।

बिजली पानी के साथ एजुकेशन को लेकर केजरीवाल सरकार गंभीर नजर आती है। उनकी नए 500 सरकारी स्कूल खोलने की योजना है। हायर एजुकेशन गारंटी योजना के तहत लोगों को पढ़ाई के लिए सरकार की गारंटी के तौर पर लोन दिया जाएगा।

सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और बसों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए लगाने की योजना केजरीवाल सरकार की है। लाखों मुसाफि‍रों को राहत देने के केजरीवाल बसों में बेहतर सुविधाएं भी मुहैया कराना चाहते हैं।

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