सड़क पर रहने वाले बच्चे बना रहे अपना बजट
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दिल्ली सरकार इन दिनों जनता से बजट तैयार करने के लिए रायशुमारी कर रही है। यह रायशुमारी वो मोहल्ला सभाओं के माध्यम से कर रही है।
दिल्ली सरकार का ये तरीका सड़क पर रहने वाले कुछ बच्चों को इतना भा गया है कि उन बच्चों को बजट से क्या चाहिए इसका पूरा मेमोरंडम तैयार कर डाला है।
इन बच्चों ने राय मश्विरे करके एक मसौदा तैयार किया है जिसमें उन्होंने ये लिखा है कि बच्चों को केजरीवाल सरकार से क्या उम्मीदें हैं।
बच्चे बोले, सर्वे जरूरी है
बता दें कि ये बच्चे स्ट्रीट चिल्ड्रेन की एक फेडरेशन 'बढ़ते कदम' से जुड़े हैं। शनिवार को जब सरकार दिल्ली में मोहल्ला सभाओं की श्रंखला आयोजित कर रही थी तब ये बच्चे खुद एक-दूसरे सलाह मश्विरा कर खुद के अनुभव के आधार पर अपना बजट बनाने में लगे हुए थे।
ये सभी बच्चे अपने अपने-अपने चार्ट और मार्करों के साथ अपना प्लान बनाने बैठे थे ताकि वो सरकार के बजट बनाने की प्रक्रिया में सहायता कर सकें। जब मुशरत परवीन से पूछा गया कि उस जैसे लगभग 16 साल के बच्चों की क्या जरूरत है तो अपनी मां के साथ घरों में काम करने वाली मुशरत बोली कि 'सर्वे जरूरी है।'
सीएम से मांगेंगे रैनबसेरे
मुशरत की बात का समर्थन करते हुए बेघर लोगों के लिए बने रैनबसेरे में रहने वाली ज्योति कहती है कि अगर सर्वे होगा तो वो और बच्चों से मिल पाएंगे और उन्हें समझा पाएंगे कि कमाई के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है।
इन बच्चों ने न केवल यह सुझाया है कि सर्वे होने चाहिए बल्कि इन लोगों ने सर्वे किस तरह से किए जाएंगे उसका पूरा विस्तार में खाका भी तैयार कर लिया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे 11 जिलों में ये सर्वे होंगे और इस वक्त वो सर्वे पर कितना खर्च आएगा उसे तैयार करने में लगे हैं।
चांदनी जो शहीद कैंप वेस्ट दिल्ली में रहती है सीएम से और रैनबसेरों की मांग करने वाली है। ये बच्चे जब बजट तैयार कर रहे थे तो इनके बहस का जो सबसे बड़ा मुद्दा था वो बच्चों के लिए और रैनबसेरों की मांग का ही था।
कम से कम 4 अस्पताल बना दें सीएम
दूसरा जो मुद्दा सबसे अहम था वो स्वास्थ्य का सामने आया। वर्तमान समय में अगर उन्हें किसी का साथ न मिले तो उन्हें स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
कूड़ा बिनने वाले बच्चों में कुत्ता काटने की समस्या आम बात है। लेकिन अगर वो इसके इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाते हैं तो या तो उन्हें भगा दिया जाता है या उनका इलाज करने से मना कर दिया जाता है।
इन बच्चों ने ही बताया कि कई ऐसे बच्चे रेबीज के शिकार हो जाते हैं बल्कि कई मर भी जाते हैं। वेटर का काम करने वाले चंदन ने बोला कि वो दिल्ली सरकार से कम से कम बच्चों के लिए चार अस्पताल बनाने को कहेंगे ताकि उन्हें सही इलाज मिल सके।
(साभारः टाइम्स ऑफ इंडिया)