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एचआईवी पीड़ित, लेकिन जिंदगी है 'पॉजिटिव', एक दूसरे की करते हैं मदद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Sat, 01 Dec 2018 02:17 AM IST
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एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ‘जिंदगी खत्म’ मान लिया जाता है। साइबर सिटी में कुछ लोग एचआईवी से पीड़ित हैं, लेकिन उनकी जिंदगी ‘पॉजिटिव’ है। जिंदगी जीने का उनका हौसला दूसरे एचआईवी पीड़ितों के लिए एक मिसाल है।
स्वास्थ्य विभाग और एड्स पर काम करने वाली संस्थाएं उनकी मिसाल देती हैं। एचआईवी पीड़ित का तमगा देकर समाज भले ही उन्हें तन्हा छोड़ देता हो, लेकिन उनका ‘हमसफर’ जिंदगी के सफर में पॉजिटिव ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसी ही कहानी है गुरुग्राम के अलग-अलग क्षेत्र के दो लोगों की
केस-1: फिर भी पति है साथ
एक कॉलोनी में रहने वाले एक दंपती में पहले पति को एड्स हुआ। कुछ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। बाद में महिला ने दूसरी शादी कर ली। महिला ने दूसरी शादी से पहले उसे सब बताया, इसके बावजूद उन्होंने शादी की। पति अब भी इस रोग से सुरक्षित है।
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अब महिला की एक बेटी है, लेकिन वो भी सिजेरियन डिलीवरी के कारण नेगेटिव है। महिला कहती है कि बीमारी की वजह को लेकर मेरे पति ने कभी शंका प्रकट नहीं की। मुझे पति के प्यार ने जीने का सहारा दिया। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उनकी समझदारी ने मुझे हमेशा हौसला दिया है।
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स्वास्थ्य विभाग और एड्स पर काम करने वाली संस्थाएं उनकी मिसाल देती हैं। एचआईवी पीड़ित का तमगा देकर समाज भले ही उन्हें तन्हा छोड़ देता हो, लेकिन उनका ‘हमसफर’ जिंदगी के सफर में पॉजिटिव ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसी ही कहानी है गुरुग्राम के अलग-अलग क्षेत्र के दो लोगों की
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केस-1: फिर भी पति है साथ
एक कॉलोनी में रहने वाले एक दंपती में पहले पति को एड्स हुआ। कुछ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। बाद में महिला ने दूसरी शादी कर ली। महिला ने दूसरी शादी से पहले उसे सब बताया, इसके बावजूद उन्होंने शादी की। पति अब भी इस रोग से सुरक्षित है।
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अब महिला की एक बेटी है, लेकिन वो भी सिजेरियन डिलीवरी के कारण नेगेटिव है। महिला कहती है कि बीमारी की वजह को लेकर मेरे पति ने कभी शंका प्रकट नहीं की। मुझे पति के प्यार ने जीने का सहारा दिया। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उनकी समझदारी ने मुझे हमेशा हौसला दिया है।
केस-2: गलती से हुई पॉजीटिव
20 साल की उम्र में एचआईवी पॉजिटिव हुई एक लड़की आज कामयाबी की मिसाल है। बीकॉम किया और एक प्राइवेट कंपनी में बतौर कॉल अटेंडेंट काम कर रही है। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि जब वह दस साल की थी, तब हेपेटाइटिस-बी हुआ था।
इस दौरान खून चढ़ाया गया। उसके बाद से वो बीमार रहने लगी। करीब पांच साल की बीमारी के बाद जांच में इसकी पुष्टि हुई। शुरुआत में परिवार वालों पर मानो पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन सभी ने मिलकर इस लड़की को हौसला दिया और अब वो पॉजिटिव जिंदगी बिता रही है।
इस दौरान खून चढ़ाया गया। उसके बाद से वो बीमार रहने लगी। करीब पांच साल की बीमारी के बाद जांच में इसकी पुष्टि हुई। शुरुआत में परिवार वालों पर मानो पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन सभी ने मिलकर इस लड़की को हौसला दिया और अब वो पॉजिटिव जिंदगी बिता रही है।