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‘द ग्रेट वॉर’ मेवातियों के बलिदान की 100 साल पुरानी कहानी, 109 लोगों ने दी थी कुर्बानी
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:09 PM IST
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प्रथम विश्वयुद्ध 1914-1919 ‘द ग्रेट वॉर’ को मेवाती कभी नहीं भुला पायेंगे। मेवात के 109 फौजियों ने शहीद होकर मांड़ीखेड़ा का नाम हिन्दुस्तान के नक्शे पर सदा के लिए अमर कर दिया। इतिहास गवाह है कि गुरूग्राम के भौंड़सी और मेवात क्षेत्र के मांड़ीखेड़ा में बने शहीद स्मारक न केवल 100 वर्ष पुरानीकहानी दोहराते है बल्कि शेरशाह सूरी की याद दिलाते है।
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वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए पर बुधवार को क्षेत्रवासियों ने आरटीआई मंच के साथ जुलूस निकालकर स्मारक की बदहाली की सच्चाई दिखाने के लिए एक ज्ञापन पत्र पीएम के नाम भेजा। आज हरियाणा शहीदी दिवस है।
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खासबात ये है कि अंग्रेजी हुकुमत के दौरान 109 रणबांकुरों की याद में मेवात की राजधानी कहे जाने वाले बड?ली चौक से तीन किलोमीटर दूर राजमार्ग पर शहीदी स्मारक बना है। जब सौ साल पहले यह बना तो इसकी कुल लंबाई 9 फुट 03 इंच थी। उपले, गोबर, बटेवड़े और लकडि?ों के अतिक्त्रस्मण के चलते यह स्मारक केवल 4 फुट 7 इंच ही दिखाई दे रहा है।
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‘द ग्रेट वॉर’ में बहादुरी के लिए अंग्रेजी हुकुमत से लोहा लेने पर इन जांबाजों को ‘रोल ऑफ ऑनर’ की उपाधि से नवाजा गया। आज भी शिलालेख पर उनके नाम गुदे हुए है। शिलालेख के चारों तरफ चार-चार फुट गोल आकार में चबूतरा बना था।
उस पर चढऩे के लिए तीन सीढि?ां भी थी। बगल में नीम का पेड़ तथा शहीदी स्मारक पर लगे दो सफेद संगमरमर के पत्थरों पर 1914-1919 ‘द ग्रेट वॉर’ लिखा है। इसके ठीक नीचे सफेद पत्थर पर ही बैज नम्बर के साथ बलिदानियों के नाम भी रांग के काले रंग से भरे, जो आज भी मिटे-मिटे दिखाई देते है।
इस स्मारक के नाम कागजों में 2 कनाल 16 मरला जमीन दर्ज है। इसकी ऐतिहासिकता के मद्देनजर हरियाणा सरकार के तत्कालीन ड़िप्टी स्पीकर आजाद मोहम्मद ने 23 सितम्बर 2007 के दिन शहीदी स्मारक को भव्य बनाने के लिए लाखों रूपये की आधारशिला रखी थी।
जो आज भी मौजूद है। लगभग 10 साल के अंतराल के बावजूद भी स्मारक पर एक नयी ईंट नहीं लगी है। कुछ लोग जानबूझकर स्मारक का काम शुरू नहीं करने देते तो कुछ खानजादा जाति से भेदभाव के चलते इस कार्य में रोडा बने है।
गत महिने एसडीएम के आश्वासन और सामाजिक संगठन आरटीआई मंच की पैरवी ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। नाईनंगला गांव के 82 वर्षीय हाजी सद्दीक लम्बरदार बताते है कि पहली आलमीजंग में मांड़ीखेड़ा गांव के 109 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
वहीं मांड़ीखेड़ा गांव की सरपंच पिंकी, जुल्फिकार भुट्टू, हैदर, बहादर खां,पूर्व उपचैयरमेन ब्लॉक समिति उस्मान दुर्रानी बताया कि शहीद स्मारक जीर्णोउद्धार का कार्य जल्द से जल्द पूरा हो।