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किरण बेदी की चुनावी चाल के पीछे है गहरी गणित

Thu, 22 Jan 2015 05:31 PM IST
Updated Thu, 22 Jan 2015 05:31 PM IST
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Story behind curtain of kiran bedi's krishna nagar candidature.

किरण बेदी के कृष्णा नगर विधानसभा सीट से चुनाव लडने के पीछे एक ऐसा राज है जिसे अभी कम ही कम ही लोग जानते हैं। असल में किरण बेदी नहीं चाहती थीं कि उन्हें कृष्णा नगर से चुनाव में उतारा जाए। उनकी पहली पसंद ग्रेटर कैलाश थी।

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यह ऐसा इलाका है जहां उच्च मध्यम वर्ग की अधिकता है और इस वर्ग को लुभाने में किरण बेदी एक बड़ा नाम बन सकती थीं। हालांकि पार्टी के दो बड़े नेताओं ने किरण बेदी को ग्रेटर कैलाश से चुनाव लड़ाने से मना कर दिया। इसके पीछे एक खास वजह थी।

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पार्टी के नं. 1 व 2 ने तय की ‌किरण की उम्मीदवारी

Story behind curtain of kiran bedi's krishna nagar candidature.

बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने भले ही कृष्णानगर सीट से पर्चा भरा हो लेकिन उनकी पहली पसंद कृष्णानगर कभी नहीं थी।

अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार किरण बेदी ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र से लड़ना चाहती थीं। लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बीजेपी और आरएसएस का गढ़ मानी जाने वाली कृष्णानगर सीट की उम्मीदवार बनाया।

बीजेपी के एक आं‌तरिक सूत्र के अनुसार पार्टी के नं.1 व 2 चाहते थे कि बेदी हर हाल में जीतें। इ‌सलिए वो कोई चांस नहीं लेना चाहते थे। बता दें कि भाजपा की लोकसभा जीत के बाद पार्टी में बने नए समीकरण के तहत मोदी के लिए नं1 व शाह के लिए नं2 का इस्तेमाल किया जाता है।

शाह को नहीं भाई ग्रेटर कैलाश सीट

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सूत्रों के अनुसार जब सोमवार रात को दिल्ली के 70 उम्मीदवारों की लिस्ट डिसाइड की जा रही थी, तो एक पहले से रखी लिस्ट में संभावित उम्मीदवार और उनके क्षेत्र के नाम थे।

बताया जा रहा है कि लिस्ट में 69 विधानसभा क्षेत्रों के आगे दो या उससे अधिक उम्मीदवारों का नाम लिखा था, वहीं ग्रेटर कैलाश क्षेत्र के आगे केवल किरण बेदी का नाम लिखा था।

संसदीय बोर्ड के सदस्यों को बताया गया कि हाल ही में बीजेपी में ‌शामिल हुईं बेदी ग्रेटर कैलाश से चुनाव लड़ना चाहती हैं। इसका कारण यह था कि बेदी मानती थीं कि वो मध्य-वर्ग और उच्च मध्य-वर्ग के लोगों को अपनी बातों से आकर्षित कर पाएंगी और चुनाव में सफल होंगी।

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मजबूत उम्मीदवारों से था हार का डर

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अखबार कहता है कि बेदी की इस इच्छा को जानकर शाह उनसे असहमत हुए थे। उन्होंने कहा कि ग्रेटर कैलाश सुरक्षित सीट नहीं हैं क्योंकि वहां पहले से ही दो मजबूत दावेदार चुनाव मैदान में हैं।

पहली तो कांग्रेस उम्मीदवार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी और दूसरे आप के सौरभ भारद्वाज। भारद्वाज ने 2013 के चुनाव में बीजेपी नेता विजय कुमार मल्होत्रा के बेटे अजय मल्होत्रा को 13,092 वोटों से मात दी थी।

इसके बाद उसी बैठक में बेदी का नाम मालवीय नगर के 5 संभावित उम्मीदवारों के साथ लिया जाने लगा। इस पर शाह ने दोबारा आपत्ति जताई क्योंकि मालवीय नगर से ही आप के मजबूत दावेदार सोमनाथ भारती चुनाव लड़ रहे हैं। इसके बाद बैठक में उपस्थित सदस्यों में बेदी के लिए सुरक्षित सीट को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

और बंद कमरे में तय हुई बेदी की सीट

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इसके बाद अमित शाह और नरेंद्र मोदी दोनों ने ही आपस में मंत्रणा की और यह निश्चय किया कि बेदी को कृष्णानगर सीट से उतारा जाए। इसके बाद अशोक रोड स्थित पार्टी के मुख्यालय पर बंद दरवाजों में हो रही बैठक से बेदी को फोन किया गया।

बेदी को बताया गया कि उन्हें पार्टी की तरफ से कृष्णानगर सीट से चुनाव में खड़े होना है। बेदी को ये भी बताया गया कि कृष्णानगर सीट पर दशकों से आरएसएस की मजबूत पकड़ रही है और पार्टी यहां कभी चुनाव नहीं हारी है।

फोन पर ही बेदी ने कृष्णानगर सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपनी सहमति जताई। फिर उन्हें नामांकन भरने के लिए तैयारी करने को कहा गया। सूत्रों का कहना है कि संसदीय बोर्ड, जिसमें कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, सुष्मा स्वराज, जेपी नड्डा और दिल्ली के सांसद भी मौजूद थे, उन सभी ने बेदी के कृष्णानगर से उम्मीदवारी को मंजूरी दी।

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