बारात आने से पहले ही दो कन्याओं को बालिका वधु बनने से ऐसे रोका
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खेलने-पढने की उम्र में बालिका वधु बनने जा रही दो कन्याओं का विवाह बाल संरक्षण अधिकारी ने रुकवाया। अधिकारी ने कन्याओं के माता-पिता को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और सजा की भी जानकारी दी। कन्याओं के परिजन विवाह की कानूनन उम्र होने तक रुकने को राजी हो गए।
बाल संरक्षण अधिकारी हेमा कौशिक ने बताया कि बुधवार को उन्हें जानकारी हुई कि सदर बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 वर्षीय कन्या की शादी की तैयारियां चल रही हैं, बृहस्पतिवार को बारात आएगी। एक अन्य मुखबिर ने सूचना दी कि मुजेसर थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में 16 वर्षीय कन्या की बारात आने वाली है।
वह सदर बल्लभगढ़ थाने के पुलिस बल के साथ कन्या के घर पहुंचीं। उन्होंने परिजनों को समझाया कि 18 वर्ष से कम उम्र की कन्या शारीरिक और मानसिक रूप से विवाह के लिए तैयार नहीं होती। छोटी उम्र में विवाह करने से कन्या का विकास रुक सकता है और उसे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
बाल विवाह कराने वालों के लिए सजा के प्रावधान की जानकारी दी
परिजनों ने ना नुकुर की तो उन्होंने बाल विवाह कराने वालों के लिए सजा के प्रावधान की जानकारी दी। परिजनों ने बारात आने की विवशत जताई। इस पर उन्होंने फोन कर कन्या के ससुराल वालों से बात की और उन्हें बारात नहीं लाने के लिए राजी कर लिया।
एसएचओ सदर बल्लभगढ़ ने बताया कि कन्या के परिजनों ने 18 वर्ष से कम उम्र में शादी नहीं करने का शपथपत्र थाने में दिया है। इसके बाद हेमा कौशिक संजय कॉलोनी चौकी इंचार्ज के साथ मुजेसर थाना क्षेत्र की उस कॉलोनी पहुंचीं जहां 16 वर्षीय कन्या की बारात आनी थी।
उन्होंने परिजनों को समझाया कि कन्या का विवाह 18 वर्ष और युवक का 21 वर्ष उम्र होने से पहले करना कानूनन जुर्म है। काफी समझाने के बाद कन्या के माता-पिता विवाह नहीं करने को राजी हुए। यहां भी पुलिस ने कन्या के माता पिता से विवाह की कानून द्वारा तय उम्र तक शादी नहीं करने का शपथपत्र लिया। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि इस वैवाहिक सीजन में वह अभी तक 13 बाल विवाह रुकवा चुकी हैं।