{"_id":"64963c0ed2d36b5e7fe22cc4ac9641ea","slug":"stf-found-fraud-gang-in-noida-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस धंधे में शामिल हैं कई लड़कियां, एसटीएफ ने पकड़ा शातिर गिरोह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस धंधे में शामिल हैं कई लड़कियां, एसटीएफ ने पकड़ा शातिर गिरोह
ब्यूरो/ अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 09 May 2015 07:31 PM IST
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दिल्ली एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में एटीएम बूथ, मोबाइल टावर, बैंक लगवाने और सस्ते टूर पैकेज बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये हड़पने वाले गिरोह को पकड़ लिया गया है। गिरोह के सरगना हरविंदर और 13 युवतियों समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया। युवतियों को जमानत पर छोड़ दिया गया है।
गिरोह से कब्जे से बिना प्रयोग किए गए 56 लाख रुपये के 137 चेक बरामद किए हैं। ये गिरोह पिछले दो साल में देशभर के 4000 लोगों से 26 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। एसटीएफ लखनऊ ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर गौतमबुद्धनगर कोर्ट में हाजिर किया और वहां से ट्राजिटहोम लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
लखनऊ एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से एक गैंग के बारे में पता चल रहा था कि वह साइबर क्राइम अपराध के माध्यम से एनसीआर समेत यूपी, हरियाणा और अन्य प्रदेशों के लोगों को फर्जी कंपनियों के नाम पर चूना लगा रहा है।
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एसटीएफ ने करीब एक माह पहले से साइबर क्राइम के स्पेशियलिस्ट और एसटीएफ के एसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में दिल्ली में टीम ने जाल बिछाया। भोले-भाले लोगों को ठगने वाले इस गिरोह को शनिवार सुबह दिल्ली में पकड़ लिया। इसमें सरगना हरविंदर सिंह (बी-1, प्लॉट नंबर-7, शक्तिखंड इंदिरापुरम गाजियाबाद) को गिरफ्तार कर लिया गया।
उसकी निशानदेही पर नई दिल्ली जामा मस्जिद कामखाना उर्दू बाजार निवासी शारिक, आगरा अटलनगर मुस्तफा क्वार्टर निवासी विष्णु कुमार, दिल्ली शहादरा निवासी खालिद, दिल्ली उत्तर नगर निवासी रत्नेश सिंह, दिल्ली अंबेडकरनगर हैदरपुर निवासी विशाल, स्वर्ण जयंतीपुरम बालाजी निवासी आशीष त्यागी, दिल्ली के कृष्णानगर शिवपुरी निवासी अशोक कुमार और 13 युवतियों समेत 20 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सभी युवतियां दिल्ली एनसीआर की रहने वाली थीं और उनको वहीं से जमानत पर छोड़ दिया गया।
ये हुई बरामदगी
आरोपियों के कब्जे से वॉकी-टॉकी के 20 सेट, एक कार, 137 चैक (मूल्य लगभग 57 लाख रुपये), 2600 रुपये, रिलायंस का फर्जी लेटर पैड़, रिलायंस थ्रीजी का टावर लगाने का एग्रीमेंट, 64 काल सेंटर का डाटा और फर्जी कंपनी के मेमोरेंडम तथा आर्टीकल की कापी बरामद की है।
64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था
एसएसपी ने बताया कि सरगना हरविंद्र ने 64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था और उनसे केवल यह काम कराता था कि वह एटीएम बूथ लगवाने, मोबाइल टावर लगवाने, रिलायंस के टावर के अलावा इंश्योरेंस समेत अन्य कई कंपनियों के नाम टूर पर भेजने के बहाने से लोगों से चैक मंगाते थे।
इनमें से करीब 95 फीसदी लोगों ने धोखाधड़ी होने के बाद भी पुलिस के समक्ष शिकायत नहीं की थी और उन्होंने सोचा था कि जो हो गया सा हो गया आगे के लिए सर्तक हो जाएं।
दो लोगों ने की थी शिकायत
बरेली के इंदिरानगर अनूप कुमार खंडेलवाल और लखनऊ के कानपुर रोड निवासी विनोद कुमार इस गैंग केखिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत पर काम शुरू किया गया तो एक बड़ रैकेट का भंडाफोड कर दिया गया। इस गैंग का दिल्ली लक्ष्मीनगर में आफिस था और हर दो तीन माह बाद दफ्तर को बदल दिया जाता था।
कैसे ऐंठते थे लोगों को
हरविंदर ने पुलिस को बताया कि उसने सभी 64 कॉल सेंटर को एक साथ जोड़ दिया था। एक कॉलसेंटर पर करीब 10 से 15 लोग रहते थे और हर रोज सभी कॉल सेंटरों के माध्यम से 150 से 200 चेक मंगाए जाते थे। इन चेक को एक्सिस वैल्यू कार्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मंगाया जाता था।
जिस कॉल सेंटर से अधिक राशि के चैक आते थे उसे उसी रेशो में लाभ का रेशो बढ़ा दिया जाता था। उसके एक अकाउंट में करीब 12 करोड़ रुपये का लेन-देन है और जबकि दूसरे अकाउंट में करीब 14 करोड़ रुपये का लेन देन था। इससे लगता है कि दो साल में करीब 25-26 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
किसी भी कीमत पर दूसरे की जेब से रुपये निकालने का था लक्ष्य
गिरोह के सरगना हरविंदर सिंह ने 64 काल सेंटर पर काम करने वाले लोगों को टारगेट दे रखा था किसी भी कीमत पर लोगों की जेब से रुपये निकलवाएं वह भी चेक के द्वारा भले ही उनको कोई प्रलोभन ही क्यों न देना पडे़।
कॉलसेंटरों द्वारा पहले तो टूर के नाम पर फोन किया जाता था लेकिन उससे ज्यादा रेस्पांस नहीं मिला तो एटीएम बूथ या मोबाइल टावर फोर जी लगवाने के एवज में हर माह 60 हजार रुपये और एक व्यक्ति को प्रतिमाह सात हजार रुपये की ऑफर दी जाती थी। इसके बाद तो चेक आने की लाइन लग गई।
पढ़े लिखे लोग आज भी कर लेते हैं दूसरों पर विश्वास
हरियाणा के एक व्यक्ति ने तो इस गैंग को अपना एटीएम कार्ड पिन नंबर समेत भेजा था लेकिन जब पता चला कि 40 हजार रुपये निकाले गए तो उन्होंने अपना अकाउंट बंद कराया। इसके अलावा यूपी के एक व्यक्ति ने ब्लैंक चैक साइन करके दे दिया था। चैक से जब ढाई लाख रुपये निकाले गए तो उस अकाउंट को भी बंद करा दिया गया था।
धोखाधड़ी की ब्लैक मनी को बनाता था व्हाइट
रुपये को सही ठिकाने पर लगाने के लिए सरगना हरविंदर ने एक एनजीओ बना रखा था। उसने 64 कॉलसेंटर पर काम करने वाले लोगों को रुपये देने के बाद जो राशि बचती थी उसे एनजीओ के खाते में भेज देता था और वह एक नंबर की धनराशि हो जाती थी। पुलिस ने दिल्ली लक्ष्मीनगर स्थित दो कॉल सेंटर सीज कर दिए हैं।
650 लोगों पर होगी कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि सरगना हरविंदर ने जिन 64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था, उनमें कार्यरत लगभग 650 लोग जाने-अनजाने इस गिरोह का साथ दे रहे थे। पुलिस अब इन सभी लोगों पर कार्रवाई करेगी।
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गिरोह से कब्जे से बिना प्रयोग किए गए 56 लाख रुपये के 137 चेक बरामद किए हैं। ये गिरोह पिछले दो साल में देशभर के 4000 लोगों से 26 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। एसटीएफ लखनऊ ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर गौतमबुद्धनगर कोर्ट में हाजिर किया और वहां से ट्राजिटहोम लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
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लखनऊ एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से एक गैंग के बारे में पता चल रहा था कि वह साइबर क्राइम अपराध के माध्यम से एनसीआर समेत यूपी, हरियाणा और अन्य प्रदेशों के लोगों को फर्जी कंपनियों के नाम पर चूना लगा रहा है।
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उसकी निशानदेही पर नई दिल्ली जामा मस्जिद कामखाना उर्दू बाजार निवासी शारिक, आगरा अटलनगर मुस्तफा क्वार्टर निवासी विष्णु कुमार, दिल्ली शहादरा निवासी खालिद, दिल्ली उत्तर नगर निवासी रत्नेश सिंह, दिल्ली अंबेडकरनगर हैदरपुर निवासी विशाल, स्वर्ण जयंतीपुरम बालाजी निवासी आशीष त्यागी, दिल्ली के कृष्णानगर शिवपुरी निवासी अशोक कुमार और 13 युवतियों समेत 20 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सभी युवतियां दिल्ली एनसीआर की रहने वाली थीं और उनको वहीं से जमानत पर छोड़ दिया गया।
ये हुई बरामदगी
आरोपियों के कब्जे से वॉकी-टॉकी के 20 सेट, एक कार, 137 चैक (मूल्य लगभग 57 लाख रुपये), 2600 रुपये, रिलायंस का फर्जी लेटर पैड़, रिलायंस थ्रीजी का टावर लगाने का एग्रीमेंट, 64 काल सेंटर का डाटा और फर्जी कंपनी के मेमोरेंडम तथा आर्टीकल की कापी बरामद की है।
64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था
एसएसपी ने बताया कि सरगना हरविंद्र ने 64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था और उनसे केवल यह काम कराता था कि वह एटीएम बूथ लगवाने, मोबाइल टावर लगवाने, रिलायंस के टावर के अलावा इंश्योरेंस समेत अन्य कई कंपनियों के नाम टूर पर भेजने के बहाने से लोगों से चैक मंगाते थे।
इनमें से करीब 95 फीसदी लोगों ने धोखाधड़ी होने के बाद भी पुलिस के समक्ष शिकायत नहीं की थी और उन्होंने सोचा था कि जो हो गया सा हो गया आगे के लिए सर्तक हो जाएं।
दो लोगों ने की थी शिकायत
बरेली के इंदिरानगर अनूप कुमार खंडेलवाल और लखनऊ के कानपुर रोड निवासी विनोद कुमार इस गैंग केखिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत पर काम शुरू किया गया तो एक बड़ रैकेट का भंडाफोड कर दिया गया। इस गैंग का दिल्ली लक्ष्मीनगर में आफिस था और हर दो तीन माह बाद दफ्तर को बदल दिया जाता था।
कैसे ऐंठते थे लोगों को
हरविंदर ने पुलिस को बताया कि उसने सभी 64 कॉल सेंटर को एक साथ जोड़ दिया था। एक कॉलसेंटर पर करीब 10 से 15 लोग रहते थे और हर रोज सभी कॉल सेंटरों के माध्यम से 150 से 200 चेक मंगाए जाते थे। इन चेक को एक्सिस वैल्यू कार्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मंगाया जाता था।
जिस कॉल सेंटर से अधिक राशि के चैक आते थे उसे उसी रेशो में लाभ का रेशो बढ़ा दिया जाता था। उसके एक अकाउंट में करीब 12 करोड़ रुपये का लेन-देन है और जबकि दूसरे अकाउंट में करीब 14 करोड़ रुपये का लेन देन था। इससे लगता है कि दो साल में करीब 25-26 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
किसी भी कीमत पर दूसरे की जेब से रुपये निकालने का था लक्ष्य
गिरोह के सरगना हरविंदर सिंह ने 64 काल सेंटर पर काम करने वाले लोगों को टारगेट दे रखा था किसी भी कीमत पर लोगों की जेब से रुपये निकलवाएं वह भी चेक के द्वारा भले ही उनको कोई प्रलोभन ही क्यों न देना पडे़।
कॉलसेंटरों द्वारा पहले तो टूर के नाम पर फोन किया जाता था लेकिन उससे ज्यादा रेस्पांस नहीं मिला तो एटीएम बूथ या मोबाइल टावर फोर जी लगवाने के एवज में हर माह 60 हजार रुपये और एक व्यक्ति को प्रतिमाह सात हजार रुपये की ऑफर दी जाती थी। इसके बाद तो चेक आने की लाइन लग गई।
पढ़े लिखे लोग आज भी कर लेते हैं दूसरों पर विश्वास
हरियाणा के एक व्यक्ति ने तो इस गैंग को अपना एटीएम कार्ड पिन नंबर समेत भेजा था लेकिन जब पता चला कि 40 हजार रुपये निकाले गए तो उन्होंने अपना अकाउंट बंद कराया। इसके अलावा यूपी के एक व्यक्ति ने ब्लैंक चैक साइन करके दे दिया था। चैक से जब ढाई लाख रुपये निकाले गए तो उस अकाउंट को भी बंद करा दिया गया था।
धोखाधड़ी की ब्लैक मनी को बनाता था व्हाइट
रुपये को सही ठिकाने पर लगाने के लिए सरगना हरविंदर ने एक एनजीओ बना रखा था। उसने 64 कॉलसेंटर पर काम करने वाले लोगों को रुपये देने के बाद जो राशि बचती थी उसे एनजीओ के खाते में भेज देता था और वह एक नंबर की धनराशि हो जाती थी। पुलिस ने दिल्ली लक्ष्मीनगर स्थित दो कॉल सेंटर सीज कर दिए हैं।
650 लोगों पर होगी कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि सरगना हरविंदर ने जिन 64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था, उनमें कार्यरत लगभग 650 लोग जाने-अनजाने इस गिरोह का साथ दे रहे थे। पुलिस अब इन सभी लोगों पर कार्रवाई करेगी।