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एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा मामला: नीट पास 1280 छात्रों को फंसाने की थी साजिश

Sat, 28 Jul 2018 04:00 AM IST
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Sat, 28 Jul 2018 04:00 AM IST
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STF Caught Gang Of 1.24 Crore Cheating With 93 Students Waiting For MBBS Entry side story
mbbs Fraud

एसटीएफ ने गिरोह के गाजियाबाद स्थित दफ्तर से नीट पास करने वाले 1280 छात्रों की सूची और मोबाइल नंबर बरामद किया है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक गिरोह इन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की साजिश में जुटा था। गिरोह अभी 93 छात्रों को अपने जाल में फंसा पाया था कि उसका भंडाफोड़ कर दिया गया। नीट पास करने वाले छात्रों की सूची व मोबाइल नंबर कोचिंग सेंटर संचालकों ने सौंपी थी। एसटीएफ अब ऐसे कोचिंग सेंटरों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।  

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एसटीएफ के मुताबिक गिरोह नीट का रिजल्ट आने के बाद सक्रिय हुआ था। इसके बाद ही छात्रों व उनके अभिभावकों के नंबर पर संपर्क साधकर कुछ ही दिनों में 93 छात्रों को अपने जाल में फंसा लिया गया। निजी कॉलेजों में मोटी रकम देने से बचने और सरकारी कॉलेजों में प्रवेश मिलने या न मिल पाने की असमंजस से बचने के लिए छात्र गिरोह के जाल में फंसते जा रहे थे। एसटीएफ ने दफ्तर से 270 गाइडेंस प्वाइंट्स, पांच सिम किट, दो मेडिकल काउंसलिंग ऑफ इंडिया के नाम से छपे ब्रोशर, एक हाथ से लिखी प्रश्नोत्तरी भी दफ्तर से बरामद की है।  
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‘गवर्नमेंट नॉमिनी कोटा’ में देते थे प्रवेश का झांसा
दफ्तर से दो फॉर्म ऐसे बरामद किए गए है, जिस पर गवर्नमेंट नॉमिनी कोटा लिखा है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह छात्र व उनके अभिभावकों को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में पहुंच का झांसा देते थे। आरोपी ये भी कहते थे कि वह छात्रों का प्रवेश गवर्नमेंट नॉमिनी कोटे में कराते हैं। पूछने पर बताते थे कि प्रवेश के लिए सांसद, विधायक, मंत्री आदि का कोटा होता है, लेकिन सभी प्रवेश नहीं कराते और अक्सर ऐसी सीटें खाली रह जाती हैं।

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नाम बदलकर दफ्तर चला रहे थे आरोपी       

STF Caught Gang Of 1.24 Crore Cheating With 93 Students Waiting For MBBS Entry side story
एमबीबीएस स्कैम - फोटो : SELF

नाम बदलकर दफ्तर चला रहे थे आरोपी       
तीनों फरार आरोपियों की पहचान नीरज त्रिपाठी, दीपक और गुप्ता के रूप में हुई है। गुप्ता का पूरा नाम पता नहीं चला पाय है। पकड़ गए आरोपियों ने बताया कि उनका मास्टरमाइंड गुप्ता ही था। वहीं सभी आरोपियों ने अलग नाम से फर्जी आधार कार्ड बना रखे थे।

आरोपी आशीष ने अपना नाम कुलदीप पता औरैया और सुधीर ने अपना नाम देवेश रखा हुआ था। आरोपियों ने बताया कि उनका (सीनियर)  मास्टर माइंड ‘गुप्ता’ है लेकिन इसका पूरा नाम पता वह भी नहीं जानते। आरोपियों ने गुप्ता के कहने पर ही छात्रों की सूची व सिम कार्ड उपलब्ध कराने की बात कही है। 

हर एंगल से की जा रही है जांच 
एसटीएफ ने सभी आरोपियों की ठगी का शिकार हुए पीड़ितों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर केस में पुख्ता सबूत जुटाने की बात कही है। वहीं, इस गोरखधंधे में किसी अन्य (कॉलेज या किसी अन्रू अधिकारी आदि) की भूमिका तो नहीं। इसकी भी जांच की जा रही है।       

छात्रों को फंसाने के लिए खोला था ‘कॉल सेंटर’ 
आरोपियों ने गाजियाबाद में दफ्तर खोलकर चार-पांच युवतियों को नौकरी पर रखा था। इन लड़कियों को नीट में सफलता प्राप्त कर चुके छात्रों व उनके अभिभावकों के नंबर दिए गए थे। दफ्तर में कॉल सेंटर की तरह काम करने वाली इन युवतियों पर छात्रों व अभिभावकों से संपर्क कर एमबीबीएस में प्रवेश के नाम पर झांसा देने का जिम्मा था। जून के पहले सप्ताह में नीट का रिजल्ट आया था। पहली कट ऑफ जारी होने के बाद दाखिले न ले पाने वाले छात्रों से संपर्क साधना शुरू कर दिया गया था। 

हर सीट के लिए मांगते थे 30 लाख तक 

STF Caught Gang Of 1.24 Crore Cheating With 93 Students Waiting For MBBS Entry side story
mbbs

हर सीट के लिए मांगते थे 30 लाख तक 
नीट पास छात्रों और अभिभावकों को 30 लाख खर्च करने पर झांसी के राजकीय मेडिकल कॉलेज में दाखिले की बात कही जाती थी। हालांकि बारगेनिंग कर 15 से 30 लाख के बीच सौदा तय कर उनसे दो लाख एडवांस मांगे जाते। कई बार 50 हजार रुपये तक एडवांस पर भी बात तय हो जाती थी। इसके बाद आरोपी झांसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए बुलाते और उनके रुकने आदि की व्यवस्था होटल में करते थे। 

प्रवेश की राह देख रहे छात्र और अभिभावकों से साधते थे संपर्क       
जानकारों के मुताबिक नीट पास करने के बाद बेहतर अंक हासिल करने वालों को शुरुआती कट ऑफ के बाद सरकारी कॉलेजों में प्रवेश मिलता है। अन्य छात्रों को निजी कॉलेजों में दाखिला लेना पड़ता है। जहां एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 65 से 85 लाख रुपये तक खर्च करने होते हैं। जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों इससे काफी कम खर्च होता है। गिरोह दाखिले के लिए इंतजार कर रहे ऐसे ही छात्राें और अभिभावकों को सरकारी कॉलेज में दाखिले का भरोसा दिलाकर ठगी करता था। 

मेडिकल कॉलेज से अभी तक नहीं मिला कोई लिंक 
अभी तक आरोपियों का राजकीय मेडिकल कॉलेज झांसी से कोई लिंक नहीं मिला है। हालांकि आरोपी छात्रों और अभिभावकों वहीं बुलाकर फॉर्म और डीजी हेल्थ के नाम से ड्राफ्ट बनवाते थे। एसटीएफ के मुताबिक ये प्रक्रिया केवल पीड़ितों को भरोसा दिलाने व झांसा देकर ठगी लिए थी। वास्तविकता में ये फार्म या ड्राफ्ट को कहीं भी जमा नहीं कराना था और न ही कोई प्रवेश दिलाना था। सूत्रों का यह भी कहना है कि एसटीएफ के एक अधिकारी को भी किसी ने कॉल कर बेटी का प्रवेश कराने का झांसा दिया था लेकिन अधिक पूछताछ करने पर कॉल काट दी गई।   

गिरोह के जाल में फंसे ज्यादातर हाई प्रोफाइल 
ग्रेटर नोएडा। एसटीएफ के मुताबिक एमबीबीएस में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए गिरोह के जाल में फंसे ज्यादातर लोग हाईप्रोफाइल हैं। इनमें विभिन्न पदों पर बैठे जिम्मेदार और बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। इसके बावजूद वह गिरोह की पड़ताल किए बिना फंस गए। वहीं कुछ पीड़ित खुलकर सामने आने से भी कतरा रहे हैं।

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