नोएडा: हर माह 30 हजार वसूलने वाले स्कूल में भी बच्चे सुरक्षित नहीं, टिफिन पर लगाई हुई है रोक
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बेहतर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए स्टेप बाई स्टेप स्कूल का नाश्ता और लंच करने के लिए जोर देता है। स्कूल ने टिफिन पर रोक लगाई हुई है। इसका सीधा मतलब पैसा कमाना ही है। बृहस्पतिवार को हुई घटना ने स्कूल के खाने की हालत बयां कर दी। स्कूल में नाश्ता करके बच्चों की तबियत बिगड़ गई।
अभिभावकों से हर माह 25 से 30 हजार रुपये वसूलने वाले स्कूल प्रबंधन को बच्चों की जान की परवाह तक नहीं। अगर ऐसा नहीं होता तो बीमार होने पर बच्चों के अभिभावकों को जानकारी देेकर तुरंत अस्पताल में भर्ती कराता। जब स्कूल ने देखा कि उसके हाथ से मामला निकल गया तो ई-मेल भेजकर अभिभावकों को इसकी जानकारी दी। स्कूल के प्रिंसिपल की तरफ से ई-मेल भेजी गई थी। इसमें लिखा था कि स्कूल के छात्रों को पेट में दर्द की शिकायत हो रही थी। अभी कारण का पता नहीं चला है।
नाश्ता और लंच के लिए 4500 रुपये
स्टेप बाई स्टेप स्कूल जिले के सबसे महंगे स्कूलों में से एक है। यहां पर पढ़ाने के लिए अभिभावकों को हर महीने 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि स्कूल प्रबंधन बच्चे को स्कूल में ही नाश्ता और लंच देता है। इसके लिए अभिभावकों से तीन महीने की फीस के साथ 4500 रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं।
नाश्ते में आलू के पराठे, ब्रेड और लंच में दाल-चावल, रोटी जैसी अन्य चीजें मिलती हैं। एक अभिभावक ने बताया कि तीन महीने में 75 हजार रुपये से ज्यादा फीस हम लोगों से ली जा रही है। इसके बावजूद भी बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था ठीक नहीं है। अन्य स्कूलों में तीन महीने में जितनी फीस ली जाती है, उतनी यहां पर एक महीने में खर्च होती है। इसके बावजूद हमारे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं।
शिक्षा विभाग को भी किया गुमराह
जिला विद्यालय निरीक्षक को इस घटना की जानकारी मिली तो शिक्षा विभाग ने स्कूल को फोन करके घटना की जानकारी ली। स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को ही गुमराह कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि एक दो बच्चों को खेलते वक्त चोट लग गई थी। निरीक्षक पीके उपाध्याय ने बताया शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी तो स्कूल ने ऐसी किसी घटना से इनकार करते हुए खेलते समय बच्चों के साथ छोटी-मोटी चोट लगने की बात बताई। किसी तरह के गंभीर मामले से इनकार कर दिया।
हाई प्रोफाइल लोगों के पढ़ते हैं बच्चे
स्कूल में उद्यमी, व्यापारी, राजनेता व बड़े अधिकारियों के बच्चे पढ़ते हैं। जैसे ही अभिभावकों को पता चला कि स्कूल में बच्चे बीमार पड़ गए हैं तो उन्होंने निचले स्तर पर कर्मचारियों को फोन करके स्कूल में भेजकर पता लगवाने की कोशिश की। घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने मीडिया को भी कोई जानकारी नहीं दी। कई बार स्कूल प्रबंधन ने गेट की चाबी खोने का बहाना बनाया।
खाना देने वाली कंपनी भी करेगी जांच
स्कूल में सोडोक्सो की तरफ से बच्चों को नाश्ता और लंच उपलब्ध कराया जाता है। सोडोक्सो की कम्यूनिकेशन स्पोक्स पर्सन सोनल शाह ने बताया कि जरूरी नहीं है कि बच्चों की तबियत खाना खाने से ही खराब हुई है। ये जांच का विषय है। इसकी जांच चल रही है। अधिकारियों ने खाने के नमूने लिए हैं। कंपनी की तरफ से जांच की जा रही है।