पराली के धुएं से फिर खराब हुई हवा, वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 पर
दिल्ली-एनसीआर में पराली जलने की घटनाएं बढ़ने की वजह से हवा का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 दर्ज किया गया। शुक्रवार को 239 दर्ज किया गया था।
केंद्रीय एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पराली जलने की वजह से राजधानी में पीएम 2.5 का स्तर 19 फीसदी पर पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम की ओर चलने वाली हवा अपने साथ पराली से उत्पन्न होने वाले प्रदूषित तत्वों को साथ ला रही है। यही वजह है कि राजधानी में प्रदूषण बढ़ रहा ह्रै।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, हरियाणा, पंजाब और इसके आसपास के इलाकों में शनिवार को पराली जलाने की 882 घटनाएं पाई गई हैं। वायु गुणवत्ता वार्निंग सिस्टम के अनुसार, शनिवार को राजधानी में मिक्सिंग हाइट 10 हजार घन मीटर प्रति सेकंड दर्ज की गई जोकि प्रदूषण फैलाने के लिए सहायक रही।
पंजाब के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार पंजाब में 4,585 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,631 था। वहीं, हरियाणा में पिछले वर्ष 16 अक्तूबर तक 1200 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई थी। जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 2,016 पर पहुंच चुका है।
धान की समय से पहले कटाई से बढ़ी पराली जलाने की घटनाएं...
पंजाब और हरियाणा में पिछले साल की तुलना में इस साल पराली (फसलों के अवशेष) जलाने की घटनाओं में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इसका प्रमुख कारण धान की फसल की समय पूर्व कटाई और खेत मजदूरों की अनुपलब्धता है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के मुताबिक, अब तक पराली जलाने की 4585 घटनाएं हो दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 1631 घटनाएं हुई थीं। इसी तरह हरियाणा में पिछले साल 16 अक्तूबर तक 1200 घटनाएं हुई थी, जबकि इस साल 2016 घटनाएं हो चुकी हैं।
पीपीसीबी के सदस्य सचिव करुणेश गर्ग ने कहा, इस साल धान की फसल की अधिक कटाई के चलते पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले साल 15 अक्तूबर तक करीब 17 लाख
मीट्रिक टन धान की कटाई हुई थी। इस साल अब तक करीब 40 लाख मीट्रिक टन कटाई हो चुकी है। इससे पता चलता है कि किसानों ने इस साल समय से पहले फसल की कटाई कर ली है। पिछले साल मानसून सितंबर अंत तक रहा था, जिससे कटाई में देरी हुई थी।
वहीं, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस नारायण ने कहा, हरियाणा में पराली जलाने की ज्यादातर घटनाएं सिरसा, फतेहाबाद और कैथल में हुई हैं। प्रशासन इन इलाकों में पराली जलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगा पाया है। नारायण के मुताबिक, खेती मजदूरों की अनुपलब्धता इसका एक कारण है।
दिल्ली में प्रदूषण के पंजाब को दोष देना गलत
गर्ग ने कहा कि दिल्ली में हवा की खराब गुणवत्ता के लिए पंजाब को दोष देना सही नहीं है। दिल्ली के प्रदूषण के लिए पराली जलाना एक कारण हो सकता है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी
एक फीसदी से भी कम है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद पंजाब को पराली जलाने पर नियंत्रण लगाने को कहा था।