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आजाद हिंद फौज: कैप्टन एसएस यादव पहले अंग्रेजों से लड़े, फिर घायल होने पर संभाली आईएनए मुख्यालय की कमान
Wed, 03 Aug 2022 09:43 AM IST
विजय पुंडीर
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Wed, 03 Aug 2022 09:43 AM IST
सार
आईएनए की तरफ से लड़ी जा रही आजादी की जंग में कैप्टन एसएस यादव ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे, लेकिन मोर्चे के नजदीक बम फटने से उनके पैर में गंभीर चोट आ गई। बावजूद वह घर वापस लौटने को तैयार नहीं हुए और आईएनए से जुड़े रहे।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी कैप्टन एसएस यादव के घर पर उनसे मिलते हुए (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आजाद हिंद फौज (आईएनए) के कैप्टन एसएस यादव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कदम से कदम मिलाया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी म्यांमार (तत्कालीन वर्मा) में अंग्रेजों के खिलाफ तैनाती थी।
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आईएनए की तरफ से लड़ी जा रही आजादी की जंग में उन्होंने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे, लेकिन मोर्चे के नजदीक बम फटने से उनके पैर में गंभीर चोट आ गई। उनकी हालत दुबारा मोर्चे पर जाने की नहीं रही। बावजूद वह घर वापस लौटने को तैयार नहीं हुए और आईएनए से जुड़े रहे। इसके बाद नेताजी ने उनको रंगून स्थित आईएनए के मुख्यालय का प्रमुख बना दिया था।
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मूलरूप से झज्जर जिले के खेड़ी खातीवास के निवासी कैप्टन एसएस यादव देश आजाद होने के बाद दिल्ली में बस गए थे और काफी वर्षों से उनका परिवार दिल्ली के सरस्वती विहार में बसा हुआ है। उन्होंने यही छह साल पहले अंतिम सांस ली। वह वर्ष 1941 में ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ जुड़ गए थे और वह नेताजी के लुप्त होने तक उसके साथ रहे।
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उन्होंने वर्ष 1945 में अंग्रेजों से लोहा लेने के दौरान घायल होने तक लड़ाई में हिस्सा लिया। वह मोर्चे पर लड़ाई की कमान संभालने के साथ-साथ नेताजी और अन्य उच्च अधिकारियों के साथ लड़ाई की रणनीति बनाने में भी शामिल रहते थे।
नेताजी की बेटी भारत आने के दौरान कैप्टन से मुलाकात करती थीं
कैप्टन एसएस यादव के नेताजी के बहुत ही करीबी होने के बारे में उनकी बेटी अनिता बोस को भी मालूम था। वह जब भी भारत आती थी तो उनसे हर हाल में मुलाकात करती थी। उनका स्वास्थ्य सही नहीं रहने पर वह दो बार सरस्वती विहार स्थित उनके घर भी मिलने के लिए आई।