जानें क्या है 'गेस्ट हाउस कांड', जिसे मायावती ने गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था याद
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लखनऊ के चर्चित गेस्ट हाउस कांड को भूलकर दोनों दल 25 साल बाद एक बार फिर साथ हुए हैं, और आगामी लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने का एलान किया है। इस दौरान मायावती लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को नहीं भूलीं। उन्होंने ने मीडिया को संबोधित करते हुए था कहा कि आज से 25 साल पहले भी सपा-बसपा के एक होने की कोशिशें हुई थीं। जिसका अंत गेस्ट हाउस कांड की घटना के रूप में हुआ। लेकिन देश व समाज के हित को देखते हुए हमने उस घटना को पीछे छोड़ दिया है।
भले ही भाजपा की तरफ से गठबंधन से लोकसभा चुनाव के गणित पर कोई फर्क न पड़ने के दावे किए जा रहे हों लेकिन जमीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है। गठबंधन के बाद होने वाले चुनावी समीकरण और जातीय गणित भाजपा के चुनावी संघर्ष को 2014 के मुकाबले ज्यादा कांटे का बनाते दिख रहे हैं। हालांकि अखिलेश और मायावती के इस गठबंधन की अपनी भी चुनौतियां हैं लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि दोनों नेताओं ने इन चुनौतियों से पार पा लिया तो यह प्रयोग कम से कम उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनावी गणित को काफी प्रभावित करेगा।
गेस्ट हाउस में जो कुछ हुआ, वो शर्मसार कर देने वाला था
अजय बोस की किताब, 'बहनजी- अ पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ मायावती' में गेस्ट हाउस कांड का जिक्र बड़ी तफसील से किया गया है। उस दिन लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में जो कुछ हुआ, वो शर्मसार कर देने वाला था। बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में बसपा और सपा साथ आए और सरकार बनाई। लेकिन जून 1995 में बसपा ने अचानक समर्थन वापसी का एलान कर दिया। इससे बौखलाए कुछ सपा कार्यकर्ता, गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में घुस गए जहां मायावती ठहरी थीं। उन पर हमला हुआ, कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। किसी तरह उन्हें बचाया गया। लेकिन एक न भूलने वाली टीस, मायावती के जेहन में बस गई।
वैसे तो सपा और बसपा 25 साल बाद एक साथ आ रहे हैं। पर, लोकसभा चुनाव में दोनों पहली बार गठबंधन करके भाजपा से लड़ेंगे। अयोध्या का विवादित ढांचा गिरने के बाद भाजपा की हवा रोकने के लिए सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो कांशीराम ने गठबंधन किया था।
वैसे इस गठबंधन के पीछे 1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान मुलायम और कांशीराम के बीच हुई दोस्ती की भी भूमिका थी। बहरहाल 1993 में बसपा का गठन हुए तब नौ वर्ष ही हुए थे। सपा तो नई-नई बनी थी। मुलायम सिंह यादव ने चंद्रशेखर से नाता तोड़कर समाजवादी पार्टी का गठन किया था।
क्या था गेस्ट हाउस कांड
1993 में सपा बसपा गठबंधन के बाद मुलायम सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने। मगर जून 1995 में तालमेल सही न बैठ पाने पर बसपा ने गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी। अब मुलायम सिंह अल्पमत हो गए। सरकार बचाने के लिए सपाई आपा खो बैठे।
समर्थन वापसी से भड़के सपा कार्यकर्ता लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां कमरा नंबर 1 में मायावती रुकी हुई थीं। सपा कार्यकर्ताओं ने कमरे को घेर लिया और हथियारों से लैस लोगों ने मायावती को गंदी गालियों समेत जाति सूचक शब्द कहे। इतना ही नहीं बसपा के कार्यकर्ताओं सहित विधायकों पर भी हमला कर दिया था।