कांग्रेस के दांव से थम जाएगी बीजेपी की मनमानी!
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दक्षिण दिल्ली नगर निगम के मेयर पद पर कांग्रेस की जीत होने से अधिकारियों के समक्ष भारी परेशानी पैदा होने के आसार हो गए है।
सदन व विभिन्न बैठकों में आयुक्त व अतिरिक्त आयुक्तों की ओर से दिए जाने वाले आश्वासन निश्चित समय में पूरे नहीं किए जाने पर उनको अपने खिलाफ कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।
ऐसे आश्वासनों को आश्वासन समिति की बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाता है और इस समिति के अध्यक्ष डिप्टी मेयर होते है। सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के लिए डिप्टी मेयर ने अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रूख अपनाने के संकेत दिए है।
बीजेपी को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने डिप्टी मेयर पद पर जीत हासिल करने के बाद इस संवैधानिक पद की शक्तियों व अधिकारों के बारे में मालूम करना आरंभ कर दिया है। उनके उस समय चेहरे खिल गए जब उनको मालूम हुआ कि आश्वासन समिति का अध्यक्ष डिप्टी मेयर होता है।
इस समिति के माध्यम से अधिकारियों की लगाम कसी जा सकती है, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न बैठकों में पार्षदों की शिकायतों को एक निश्चित समय अवधि के दौरान दूर करने का आश्वासन देते है।
खास बात यह है कि उस अवधि के दौरान पार्षदों की शिकायत दूर नहीं होती। ऐसे उदाहरण पिछले कई वर्षों के दौरान देखे जा चुके है। इस तरह कांग्रेस के हाथ में अधिकारियों की खिंचाई करने के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने का हथियार मिल गया है।
अभी तक नहीं लिया बीजेपी से पंगा
अभी तक डिप्टी मेयर उसको समर्थन दे रही बसपा के पार्षदों के पास रहा था। उन्होंने दोनों वर्ष अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा के साथ कोई पंगा नहीं लिया।
नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार दो वर्ष के दौरान दोनों डिप्टी मेयर ने आश्वासन समिति की बैठक कराने में कोई रूचि नहीं ली। इस समिति की दो वर्ष में दो ही बैठक हुई।
डिप्टी मेयर प्रवीण राणा ने स्पष्ट संकेत दिए कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। सदन व विभिन्न समितियों की बैठकों में पार्षदों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर कार्रवाई के लिए दिए जाने वाले वायदों को निश्चित समय में पूरे कराने पर वह जोर देंगे। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी।