भारती का पत्नी के प्रति क्रूर रवैया बना मुसीबत
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सोमनाथ भारती का आक्रामक रवैया ही उसके लिए हानिकारक बन गया। अदालत ने माना कि जिस प्रकार के आरोप पहले लगते रहे हैं वे पारिवारिक विवाद के हैं, लेकिन याची भारती का जो रवैया रहा है वह क्रूरता व हिंसा में मामले को तब्दील कर देता है।
अदालत ने लिपिका के सात माह के गर्भधारण की अवधि में कुत्ते से कटवाने व मालवीय नगर में नाइजीरियन महिलाओं से किए गए व्यवहार को मुख्य रूप से अग्रिम जमानत न देने का आधार बनाया है।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में पेश साक्ष्य व दस्तावेजी साक्ष्यों को देखने के बाद कहा कि लिपिका से दुर्व्यवहार, मारपीट कोई नया आरोप नहीं है। महिला अपराध शाखा में की शिकायत के बावजूद लिपिका अपना घर तोड़ना नहीं चाहती थी।
लिपिका पर किए क्रूर हमले
अदालत ने लिपिका द्वारा 20 मार्च, 2013 को भारती को भेजे एक मेल का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों के बीच यह मामला दहेज प्रताड़ना का कोई आम मामला नहीं है।
बल्कि इस मामले में सामने आया है कि लिपिका पर क्रूर हमले किए गए। उन्होंने कहा कि लिपिका ने मेल में अपने पर हुए अत्याचार का हवाला दिया है।
मेल में लिपिका ने भारती को कहा है कि आपके हिंसक कुत्ते ने उसकी गर्दन, हाथ व शरीर के अन्य हिस्सों में छह बार काटा है।
काटे हुए स्थान को देख भी नहीं पा रही थी
छह माह की गर्भवती होने के कारण वह अपने शरीर के निचले हिस्सों पर काटे हुए स्थान को देख भी नहीं पा रही। आईने में देखकर घाव का पता चला है। मैं फोटो के साथ भेज रही हूं।
दर्द से कराह रही हूं, तुम से कहती हूं कि अपने हिंसक कुत्ते को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करो। अदालत ने मालवीय नगर में नाइजीरियन महिलाओं के साथ बदसलूकी को भी गंभीरता से लिया है।
अदालत ने कहा कि भारती के खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमे दर्शाते हैं कि वह घर पर ही हिंसक व अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं करते थे बल्कि बाहर आम लोगों के साथ भी उनका व्यवहार ठीक नहीं है।