..तो क्या दिल्ली अभी भी इस रेस में मुंबई से पीछे है?
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वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की दौड़ में केंद्र सरकार की तरफ से लगाई गई बाधा को दिल्ली सरकार दूर करना चाहती है। आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार में यूनेस्को पर्यटन विभाग की तरफ से नामांकन दाखिल किया गया था।
लेकिन गत दिनों उसे रोके जाने की सूचना यूनेस्को के वेबसाइट से मिली थी। बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्य सचिव, तमाम विभागों के सचिव व जुड़े अधिकारियों की बैठक ली। यह पता लगाने का प्रयास किया कि यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज सिटी के लिए जो नॉमिनेशन किया था, उससे बाहर कैसे किया गया?
केन्द्र सरकार से आए अधिकारी भी यह नहीं बता पाए कि यूनेस्को ने किस आधार पर इसे रोका है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नामांकन वापस लिए जाने पर आश्चर्य भी व्यक्त किया। मुख्य सचिव केके शर्मा को निर्देश दिया है कि विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के साथ बातचीत करें।
केजरीवाल ने बैठक में यह भी साफ किया है कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात भी करेंगे। बैठक में पर्यटन मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर भी शामिल हुए।
क्या होगा दिल्ली को फायदा?
मुख्यमंत्री को संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के साथ मुंबई भी रेस में थी। दोनों शहर नामांकन की वकालत कर रहे थे। दिल्ली के अधिकारियों का कहना है कि जनवरी, 2014 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब हैरिटेज सिटी के लिए दिल्ली ने नामांकन किया था।
यूनेस्को के साथ कई मैराथन बैठक हुई, विदेशी टूर पर दिल्ली के अधिकारी गए, विशेष ऑफिस सेटअप किया गया लेकिन अंतिम पड़ाव पर पहुंचने के पहले नामांकन रुकवा दिया गया।
पर्यटन मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर का कहना है कि केन्द्र सरकार को एक चिट्ठी भेजी जा चुकी है। अभी तक जवाब नहीं मिला है। अब मुख्य सचिव संपर्क करेंगे। जरूरत पड़ेगी तो हम केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
अभी भी यह फाइनल पता नहीं चला है कि दिक्कत कहां से हुई। 20 जून से बैठकें होनी है जो जुलाई तक चलेगी। अगर इस साल फिर से नामांकन नहीं लग पाया तो अगले साल केलिए प्रयास जारी रखा जाएगा।