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'कॉकरोच' को मिला किसानों का साथ: आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होगा संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल

Sat, 04 Jul 2026 04:40 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 04 Jul 2026 04:40 PM IST
सार

एसकेएम अपने बयान में कहा कि छात्र और युवा भी किसानों के ही बच्चे हैं और वे ही भारत का भविष्य हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का यह दृढ़ विश्वास है कि युवाओं का संघर्ष ही किसानों का संघर्ष है। ऐसे में युवाओं के भविष्य और न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा होना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

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SKM delegation to join CJP protest at Jantar Mantar on Sunday
भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक - फोटो : पीटीआई

विस्तार

परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरने को अब देश के सबसे बड़े किसान संगठन का समर्थन मिल गया है। वर्ष 2020-21 में केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन की अगुवाई करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। एसकेएम ने एलान किया है कि उसका एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा।

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किसान हर छात्र और युवा के साथ
सीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दिपके को लिखे एक पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वे इस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ 'पूरी एकजुटता' के साथ खड़े हैं। किसान संगठन ने कहा कि देश के छात्र, युवा और उनके परिवार जो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसान उनके साथ हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, रविवार सुबह 11 बजे किसानों का यह प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेगा। यह दौरा प्रदर्शनकारी छात्रों और लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में होगा, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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'किसानों के बच्चे ही हैं देश का भविष्य'
संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए 'क्रोनिक पेपर लीक और परीक्षा कुप्रबंधन' से प्रभावित हुए लाखों छात्रों और उनके परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की है। संगठन ने अपने पत्र में साफ कहा कि हर छात्र को एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय शिक्षा व परीक्षा प्रणाली का अधिकार है और इसमें जवाबदेही तय करना पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है।

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एसकेएम ने की थी निंदा
एसकेएम ने याद दिलाया कि आगामी आंदोलन से पहले, 17 जून को उनकी राष्ट्रीय परिषद ने बकायदा एक प्रस्ताव पारित कर शिक्षा क्षेत्र में फैले कथित 'घोटाला तंत्र' का विरोध किया था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। इसके साथ ही किसान संगठन ने सीजेपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगाए गए प्रतिबंध की भी कड़े शब्दों में निंदा की है।

छात्र व युवा किसानों के ही बच्चे
एसकेएम अपने बयान में कहा कि छात्र और युवा भी किसानों के ही बच्चे हैं और वे ही भारत का भविष्य हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का यह दृढ़ विश्वास है कि युवाओं का संघर्ष ही किसानों का संघर्ष है। ऐसे में युवाओं के भविष्य और न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा होना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

एसकेएम ने लोगों से की जंतर मंतर आने की अपील
मोर्चा ने उम्मीद जताई है कि रविवार को उनके प्रतिनिधिमंडल के जंतर-मंतर पहुंचने से इस लोकतांत्रिक आंदोलन को और मजबूती मिलेगी, जिससे सरकार को सार्थक बातचीत करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी जरूरी कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसके साथ ही एसकेएम ने देश के आम नागरिकों, मजदूरों और किसानों से भी अपील की है कि वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों की इस न्यायसंगत मांग को अपना समर्थन दें।

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