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वित्त मंत्रालय के छह कर्मचारियों को जेल

Mon, 23 Jun 2014 03:45 AM IST
Updated Mon, 23 Jun 2014 03:45 AM IST
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Six employees arrests of Ministry of Finance in the bribery

भ्रष्टाचार पैसा कमाने का सुरक्षित व शॉर्टकट रास्ता नहीं, बल्कि जेल जाने का रास्ता है। जो भी रिश्वत खाएगा वो सीधा जेल जाएगा। विशेष सीबीआई कोर्ट ने यह टिप्पणी एलटीसी घोटाला मामले में दोषियों को सजा सुनाते हुए की है।

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वित्त मंत्रालय के तीन पूर्व व दो वर्तमान कर्मचारियों और एक अन्य शख्स को एलटीसी घोटाले में दोषी ठहराते हुए विशेष सीबीआई अदालत ने चार साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों ने फर्जी बिलों के सहारे 4.20 लाख रुपये का घोटाला किया था।
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साकेत स्थित विशेष सीबीआई जज संजीव जैन ने नौ जून के अपने फैसले में छह लोगों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा संबंधी धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

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सुनवाई के दौरान दो की मौत

Six employees arrests of Ministry of Finance in the bribery

अदालत ने वित्त मंत्रालय के कर्मचारी लख्मी चंद (67), बले सिंह कसाना (55), भगवान सिंह (55), रघुवेंद्र कुमार (63), जेएल चोपड़ा (70) को चार साल कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में दोषी ठहराए गए लख्मी चंद, रघुवेंद्र कुमार व जेएल चोपड़ा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

अदालत ने वित्त मंत्रालय में तैनात रहे एसकेडी नाइक (52) को भी दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने चोपड़ा के अलावा सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। चोपड़ा पर अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

अदालत ने दूसरी ओर साक्ष्यों के अभाव में वित्त मंत्रालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुरुषोत्तम लाल को बरी कर दिया है जबकि दो आरोपियों रमेश चंद्र शुक्ला व दिवाकर दीक्षित की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।

क्या थे आरोप?

Six employees arrests of Ministry of Finance in the bribery

सीबीआई ने वित्त मंत्रालय के उप-सचिव इंदिरा मूर्ति की शिकायत पर 20 अप्रैल 2000 को केस दर्ज किया था।

एफआईआर में कहा गया कि फर्जी तरीके से एलटीसी का पैसा लेने संबंधी वित्तीय गड़बड़ी का मामला वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की एक अप्रैल 1996 से 31 मार्च 1998 की अवधि के ऑडिट में सामने आई थी।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा कि आपराधिक साजिश के तहत 44 फर्जी व बोगस बिलों को पास करके 4,20,321 रुपये सरकारी खजाने से आरोपियों ने निकाले थे।

स्टिंग के बाद चार पुलिसकर्मी नपे

Six employees arrests of Ministry of Finance in the bribery

एक निजी टीवी न्यूज चैनल पर अपराध शाखा के पुलिसकर्मियों का स्टिंग दिखाए जाने के बाद पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया जबकि इंस्पेक्टर, एसआई व एएसआई को लाइन हाजिर कर दिया गया।

चैनल में एक मुखबिर को पुलिस का पूरा चिट्ठा खोलते हुए दिखाया गया है। स्टिंग के अनुसार, मुखबिर ने बताया है कि पुलिसकर्मी किस तरह रुपये लेकर बदमाशों के गैंग को छोड़ देती है।

बाद में बदमाशों के दिए गए रुपये मुखबिर के अकाउंट में जमा कराकर कुछ समय बाद अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। पुलिस ने टीवी चैनल से स्टिंग फुटेज के अलावा मामले से जुड़े दस्तावेज भी मांगे हैं।

घूस लेने के आरोपी मुंशी और सिपाही सस्पेंड

Six employees arrests of Ministry of Finance in the bribery

ट्रक छोड़ने के एवज में 45 हजार रुपये घूस मांगने के आरोपी बादशाहपुर थाने के मुंशी और सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों के खिलाफ करप्शन एक्ट का मामला दर्ज किया गया है।   

मामला दो दिन पहले का है। महालक्ष्मी गार्डन निवासी कबाड़ व्यापारी नियाजुद्दीन ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में बताया कि 20 जून को चेकिंग के दौरान बादशाहपुर थाने में तैनात सिपाही सुरेंद्र ने कबाड़ से भरे ट्रक को जबरदस्ती रुकवा लिया और चालक को हिरासत में ले लिया।

व्यापारी का आरोप है कि थाने में सिपाही सुरेंद्र और मुंशी नरेश ने उसे थाने में बुला लिया और उसे कई घंटों तक थाने में बैठाए रखा। ट्रक छोड़ने के बदले 45 हजार रुपये देने की मांग रखी गई। साथ ही न देने पर उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। नियाजुद्दीन का आरोप है कि करीब पांच घंटे के बाद दोनों पुलिसकर्मियों ने 45 हजार रुपये रिश्वत लेकर उसे और चालक को छोड़ दिया।

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