सिसोदिया ने जंग को लिखा पत्र, कहा समिति भंग कर लौटाएं फाइल
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को पत्र लिखकर उपराज्यपाल नजीब जंग से अपील की है कि सरकार के डेढ़ साल के फैसलों की जांच के लिए गठित समिति भंग करें।
जो फाइलें उपराज्यपाल कार्यालय ने जब्त की हैं, वो संबंधित विभागों को वापस करें। ऐसा नहीं करने से दिल्ली सरकार के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में गैर कानूनी बाधा आ रही है। मनीष सिसोदिया ने 14 अक्तूबर को अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली बैठक में लिए गए फैसले से पत्र के माध्यम से एलजी को अवगत कराया है।
सिसोदिया ने लिखा है कि संविधान या किसी भी कानून-नियम में चुनी गई सरकार के फैसलों की समीक्षा, अधिकारियों को डराने, आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करने वाली समिति गठन का अधिकार उपराज्यपाल को नहीं है।
'एलजी को नहीं समिति गठन का अधिकार'
सिसोदिया ने लिखा है कि मंत्री को कुछ स्पष्ट रूप से वर्णित मामलों को छोड़कर हर मामले को उपराज्यपाल के पास भेजने की जरूरत किसी नियम या संविधान में नहीं है। कैबिनेट पिछले 25 साल में बनी प्रशासनिक व संवैधानिक परंपराओं का पालन कर रही है।
समिति का गठन व कार्य नियम व संविधान के खिलाफ है। उपमुख्यमंत्री ने दोहराया है कि उपराज्यपाल समेत सभी संबंधित लोगों को जनादेश वाली सरकार को काम करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा है कि सरकार मामले के समाधान का लगातार प्रयास कर रही है। इससे पहले सरकार ने शुंगलू कमेटी को पत्र लिखा, फिर कैबिनेट ने समिति को असंवैधानिक करार दिया, उपराज्यपाल पत्र लिखा और अब दूसरी बार पत्र लिखा है।